प्राचीन भारत

प्राचीन भारतीय इतिहास : 22 – शुंग और कण्व

अशोक की मृत्यु के बाद ही मौर्य साम्राज्य का पतन आरम्भ हुआ, उसके बाद के शासक अधिक कुशल नहीं था। और धीरे-धीरे मौर्य साम्राज्य की शक्ति क्षीण होती गयी। अशोक के बाद कुणाल शासक बना, जिसे दिव्यावदान ने धर्मविवर्धन कहा गया है। वृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था, उसके सेनापति ने उसकी हत्या कर

प्राचीन भारतीय इतिहास : 21 – मौर्य साम्राज्य में प्रशासन

मौर्य काल में राजधानी पाटलिपुत्र में स्थित थी। प्रशासन को सुचारू रूप से चलने के लिए साम्राज्य को चार प्रमुख भागों में बांटा गया था। पूर्वी क्षेत्र की राजधानी तौसाली थी। उत्तरी क्षेत्र की राजधानी तक्षशिला थी जबकि पश्चिमी उज्जैन में स्थित थी। दक्षिणी क्षेत्र की राजधानी सुवर्णगिरी थी। मौर्य प्रशासन की जानकारी का मुख्य

प्राचीन भारतीय इतिहास : 20 – मौर्यकाल में अर्थव्यवस्था, समाज तथा संस्कृति

आर्थिक स्थिति मौर्यकाल की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और इससे सम्बंधित गतिविधियों पर आधारित थी। इस दौरान व्यापार भी किया जाता था। भूमि पर राजा का अधिकार होता था, इस प्रकार की भूमि को सीता कहा जाता था। इस भूमि पर कृषि कार्य करने के लिए दास अथवा कर्मकारों को नियुक्त किया जाता था। कई क्षेत्रों

प्राचीन भारतीय इतिहास : 19 – मौर्य साम्राज्य – चन्द्रगुप्त और बिन्दुसार

चन्द्रगुप्त मौर्य (322-298 ईसा पूर्व) चन्द्रगुप्त मौर्य भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण शासक था। चन्द्रगुप्त मौर्य के कार्यकाल से पहले सिकंदर ने भारत पर आक्रमण करके कई क्षेत्रों को अपने अधीन किया था। सिकंदर ने अपने जीते हुए क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधियों को रखा था। मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी, इसमें चाणक्य

प्राचीन भारतीय इतिहास : 18 – मौर्य साम्राज्य- अशोक

अशोक भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण शासकों में से एक है। अशोक ने भारतीय महाद्वीप के सबसे बड़े राज्य का गठन किया था। विभिन्न स्थानों से प्राप्त अभिलेखों में उसे देवानामपियदस्सी कहकर संबोधित किया गया है। भब्रू अभिलेख में उसे प्रियदर्शी, जबकि मास्की में बुद्धशाक्य कहा गया है। मास्की, गुर्जरा, नित्तुर तथा उदगेलम अभिलेख में

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