प्राचीन भारत

प्राचीन भारतीय इतिहास : 12 – जैन साहित्य

जैन साहित्य अत्यंत विशाल है, यह अधिकतर अपभ्रंश, प्राकृत और संस्कृत भाषा में लिखा गया है। महावीर स्वामी की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र मगध रहा, इसलिए उन्होंने उपदेश भी लोक भाषा आर्धमागधी में दिए। महावीर स्वामी के उपदेश जैन आगमों में सुरक्षित हैं। जैन धर्म के श्वेताम्बर समुदाय द्वारा आगमों को प्रमाणिक माना जाता है,

प्राचीन भारतीय इतिहास : 11 – जैन धर्म का उदय

जैन शब्द संस्कृत शब्द जिन से बना है, जिसका अर्थ है – विजेता। जो अपने मन, वाणी व शरीर पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, उसे जिन कहा जाता है। जैन धर्म में वस्त्रहीन शरीर, शाकाहारी भोजन और निर्मल वाणी जैसे सिद्धांतों का पालन किया जाता है। जैन महात्मा को निर्ग्रन्थ कहा जाता है जबकि

प्राचीन भारतीय इतिहास : 10 – भारत में वर्ण व्यवस्था और इसका उद्भव

भारत में वर्ण व्यवस्था के अंतर्गत समाज को चार भागों में बाँटा गया है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। प्रारम्भ में वर्ण व्यवस्था कर्म-आधारित थी जो उत्तर वैदिक काल के बाद जन्म-आधारित हो गयी। ब्राह्मण– पुजारी, विद्वान, शिक्षक, कवि, लेखक आदि। क्षत्रिय– योध्दा, प्रशासक, राजा। वैश्य– कृषक, व्यापारी शूद्र– सेवक, मजदूर आदि। उद्भव सर्वप्रथम सिन्धु

प्राचीन भारतीय इतिहास : 9 – उत्तर वैदिक कालीन साहित्य

उत्तर वैदिक काल में अंतिम तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद की रचना की गयी। इसके अलावा उपनिषद, पुराण, अन्य ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, वेदांग की भी रचना की गयी। सामवेद सामवेद में 1,875 ऋचाएं हैं, इसमें 75 सूक्तों को छोड़कर शेष ऋग्वेद से लिए गए हैं। यह भारतीय संगीतशास्त्र की सबसे पुरानी पुस्तक है। सामवेद का

प्राचीन भारतीय इतिहास : 8 – उत्तर वैदिक काल- समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म

उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक स्थिति उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन आये।उत्तर वैदिक काल में जनजातीय व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त होने लगी।इस दौरान कई क्षेत्रों में छोटे-छोटे राज्य अस्तित्व में आने लगे। जन का स्थान जनपद द्वारा लिया गया। अब क्षेत्रों पर आधिपत्य के लिए युद्ध आरम्भ हुए, कई कबीले व राज्यों

3 / 512345