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प्राचीन भारतीय इतिहास : 2 – प्रागैतिहासिक भारत

प्रागैतिहासिक मानव का समयकाल, मानव की उत्पत्ति से 3000 ईसा पूर्व माना जाता है। यह मानव का शुरूआती समयकाल था और उसकी जीवन शैली भी अधिक विकसित नहीं थी, इस काल के सम्बन्ध में अधिक लिखित साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन करने के लिए पुरातात्विक साक्ष्य का उपयोग किया जाता है। प्रागैतिहासिक

प्राचीन भारतीय इतिहास : 1 – प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

भारत के इतिहास के सम्बन्ध के अनेकों स्त्रोत उपलब्ध हैं, कुछ स्त्रोत काफी विश्वसनीय व वैज्ञानिक हैं, अन्य मान्यताओं पर आधारित हैं।प्राचीन भारत के इतिहास के सम्बन्ध में जानकारी के मुख्य स्त्रोतों को 3 भागों में बांटा जा सकता है, यह 3 स्त्रोत निम्नलिखित हैं : पुरातात्विक स्त्रोत साहित्यिक स्त्रोत विदेशी स्त्रोत (i) पुरातात्विक स्त्रोत

भारतीय संस्कृति -7: मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य कला

राजपूत काल के बाद भारत में तुर्कों के आक्रमण के साथ मध्यकालीन भारत का इतिहास शुरू होता है। 7वीं सदी से 11वीं सदी तक मुस्लिम आक्रमणों का सफल प्रतिरोध भारत के राजपूत राजाओं ने किया। लेकिन तराइन के तीसरे युद्ध के पश्चात भारत में मुस्लिम वास्तुकला का पहला नमूना कुतुबुद्दीन ऐबक के समय से शुरू

भारतीय संस्कृति -6: प्राचीन भारतीय वास्तुकला

प्राचीन भारतीय वास्तुकला का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है – सिंधु घाटी सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता विश्व के इतिहास की पहली नगरीय सभ्यता थी। इसकी खोज 1921 में हुई। इसमें खुदाई के दौरान स्थापत्य क्ला के जो नमूने प्राप्त हुए वो उस समय की अन्य सभ्यताओं से अधिक श्रेष्ठ थे। इसमें नगरों का विकास