अक्टूबर में लांच किया जायेगा “डीप ओशन मिशन”

हाल ही में भारत सरकार ने “डीप ओशन मिशन” को मंज़ूरी दी है। इस पांच वर्षीय योजना के लिए 8000 करोड़ रुपये आबंटित किये गये हैं। इस  मिशन का उद्देश्य गहन महासागर में खोज करना है, इसके द्वारा धातुओं तहत खनिजों की खोजा जाएगा। UN International Sea Bed Authority ने भारत को केन्द्रीय हिन्द महासागर बेसिन में 75,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आबंटित किया है।

मुख्य बिंदु

इस अभियान में गहन सागर उत्खनन, जलमग्न वाहन, जलमग्न रोबोटिक्स, सागरीय जलवायु परिवर्तन इत्यादि के सम्बन्ध में कार्य किया जायेगा।

भारत की विशिष्ठ आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) 2.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, इसमें भारत का विशाल समुद्री क्षेत्र शामिल है, जिसका अभी तक दोहन नहीं हो सका है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र प्राधिकरण (UN-ISBA) द्वारा पॉलीमेटलिक नोड्युल के दोहन के लिए केन्द्रीय हिन्द महासागर बेसिन में भारत को 1,50,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आबंटित किया गया है। इन चट्टानों में लोहा, निकल, मेग्नीज़ और कोबाल्ट जैसी धातुएं पायी आती है। एक अनुमान के अनुसार केन्द्रीय हिन्द महासागर बेसिन में लगभग 380 मिलियन मीट्रिक टन पॉलीमेटलिक नोड्युल का भंडार है।

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