ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध क्यों ज़रूरी है?

देश में ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री तथा वितरण पर रोक लगाने लोकसभा में विधेयक प्रस्तुत किया गया। ई-सिगरेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। इसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गयी।  वित्त मंत्री के अनुसार देश में 450 से अधिक ई-सिगरेट ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन अभी भारत में ई-सिगरेट का उत्पादन नहीं किया जाता। गौरतलब है कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 9 लाख लोगों की मौत तम्बाकू के कारण होने वाली बीमारियों के कारण होती है।

ई-सिगरेट व इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS)

ENDS एक प्रकार की डिवाइस होती हैं जो एक विलय को ऊष्मा प्रदान करके एरोसोल का निर्माण करती हैं, इसमें फ्लेवर होते हैं। ई-सिगरेट ENDS का एक प्रमुख प्रोटोटाइप है। यह डिवाइस जलती नहीं है और न ही यह तम्बाकू का उपयोग करती हैं। यह डिवाइस विलय को वाष्पीकृत करती है, जिसे उपभोक्ता श्वास के साथ अन्दर लेता है। इसके विलय में निकोटीन, प्रोपाइलिन ग्लाइकोल इत्यादि का उपयोग किया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्राज़ील, मेक्सिको, उरुग्वे, बहरीन, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में ENDS पर प्रतिबन्ध लगाया जा चुका है। ENDS का सेवन गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए काफी नुकसानदेह होता है। इसमें निकोटीन तथा अन्य मादक पदार्थों व रसायनों का उपयोग किया जाता है। ENDS का सेवन गर्भवती महिलाओं में भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है। इसके सेवन से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

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