केंद्र सरकार ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया

केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया है। यह अनुबंध 6,311 करोड़ रुपये में दिया गया है। यह 8 सबमरीन (पनडुब्बी) रोधी युद्धक सतही जल पोत भारतीय नौसेना के लिए निर्मित की जायेंगी।

मुख्य बिंदु

भारतीय नौसेना ने अप्रैल, 2014 में RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की थी। GRSE ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के डिजाईन व निर्माण के लिए विनिंग बिड लगायी थी ।

GRSE द्वारा इन पोतों का निर्माण करना “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इस अनुबंध के तहत पहली पोत अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद 42 महीने के अन्दर डिलीवर की जायेगी। इसके बाद प्रतिवर्ष दो पोत डिलीवर की जायेंगी। यह प्रोजेक्ट 84 महीने में पूर्ण हो जाएगा।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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