केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने पोक्सो अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने पोक्सो अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दे दी है। पोक्सो अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के यौन शोषण के गंभीर अपराध के लिए मृत्यु दंड को मंज़ूरी दी गयी है।

बाल यौन शोषण के विरुद्ध अन्य कानून

इससे पहले संसद ने अपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया था। इस बिल के तहत 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के यौन शोषण पर फांसी की सजा का प्रावधान इस बिल के द्वारा भारतीय दंड संहिता और पोक्सो एक्ट में संशोधन किये गए हैं।

इस विधेयक के द्वारा 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के यौन शोषण के लिए 20 वर्ष की कैद अथवा मृत्युदंड की सजा का प्रावधान है, जबकि 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के सामूहिक यौन शोषण के लिए उम्र कैद अथवा मृत्युदंड का प्रावधान है। 16 वर्ष से कम आयु की किशोरी के यौन शोषण के लिए अधिकतम सजा को 10 वर्ष से बढाकर 20 वर्ष किया गया है, इसे उम्र कैद में भी बदला जा सकता है। जबकि व्यस्क महिला के यौन शोषण के लिए सश्रम कारावास की सजा को 7 वर्ष से बढाकर 10 वर्ष किया गया है, इसे उम्र कैद में भी बदला जा सकता है।

इस बिल में शीघ्र ट्रायल की व्यवस्था की गयी है, इसके अनुसार ट्रायल 2 महीने में पूरा हो जाना चाहिए। 16 वर्ष के कम उम्र की बालिकाओं के यौन शोषण के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

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