जम्मू-कश्मीर ने यौन उत्पीड़न पर क़ानून पारित किया

जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा ने कार्यालय में यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कानून पारित किया, जम्मू-कश्मीर इस तरह का कानून पारित करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्यपाल सत्य पाल मलिक की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक परिषद् ने भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) बिल, 2018 तथा जम्मू-कश्मीर अपराधिक कानून (संशोधन) बिल, 2018 को मंज़ूरी दी।

प्रमुख विशेषताएं

इस विधेयक के द्वारा अपराधिक कार्यवाही संहिता व अनुभाग के सेक्शन 154 तथा 161 में संशोधन किया गया है। इसके द्वारा कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न को RPC में वर्णित अपराध के समान अपराध घोषित किया गया है।

रणबीर दंड संहिता के सेक्शन 354 में एक अन्य अनुभाग “E” जोड़ा गया है, इसके द्वारा यौन उत्पीड़न के दोषी को 3 वर्ष कैद की सजा का प्रावधान किया गया है।

354 E सेक्शन में यौन उत्पीड़न तथा शक्तिशाली पद पर मौजूद व्यक्तियों द्वारा कार्यस्थल में धन की जबरन वसूली को शामिल किया गया है।

नए संशोधन में दुर्व्यवहार को परिभाषित किया गया है, इसके सेक्शन 5 के तहत यौन पक्ष की मांग को दुर्व्यवहार की श्रेणी में रखा गया है।

रणबीर दंड संहिता

भारतीय दंड संहिता जम्मू-कश्मीर में कार्य नहीं करती, इसके स्थान पर रणबीर संहिता का उपयोग किया जाता है। इस संहिता को डोगरा राजवंश के दौरान रणबीर सिंह द्वारा शुरू किया गया, इसकी शुरुआत 1932 में हुई थी। इसमें मौजूद प्रावधान थॉमस बेबिंगटन मैकाले द्वारा तैयार किये गये थे।

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