दंड मात्रा के आधार पर निर्धारित किया जाएगा: मादक पदार्थ विरोधी कानून पर सर्वोच्च न्यायालय

23 अप्रैल, 2020 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रतिबंधित दवा मिश्रण की मात्रा के आधार पर अपराधी की सजा तय की जायेगी न कि शुद्धता पर। शीर्ष अदालत ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट के तहत यह स्पष्टीकरण दिया है।

मुख्य बिंदु

अवैध दवा बाजारों में दवाओं को मिलावटी या अन्य पदार्थों के साथ मिलाया जाता है। यह हेरोइन की वाष्पीकरण दर को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें चाक पाउडर, जस्ता ऑक्साइड और अन्य सस्ती लेकिन अधिक खतरनाक अशुद्धियों को मिलाया हैं।

नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक एक्ट, 1985

यह अधिनियम एक व्यक्ति को मादक दवाओं के निर्माण, उत्पादन, खेती, स्वामित्व, खरीद, भण्डारण, परिवहन या उपभोग करने के लिए प्रतिबंधित करता है। इस अधिनियम के तहत, अधिनियम के प्रशासन से संबंधित मामलों पर सलाह देने के लिए भारत सरकार नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ परामर्श समिति का गठन कर सकती है। इस समिति में अधिकतम 20 सदस्य हो सकते हैं। इस अधिनियम के तहत, नशीली दवाओं के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार राष्ट्रीय कोष का गठन करेगी।

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