प्लास्टिक कचरे को बेसल संधि में शामिल किया गया

संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में 12 दिन तक चली समझौता वार्ता के उपरान्त 180 सरकारों ने नए संयुक्त राष्ट्र समझौते पर सहमती प्रकट की है, इस समझौते में प्लास्टिक कचरे को आयात-निर्यात को विभिन्न देशों के बीच नियमित करने के लिए व्यवस्था की गयी है।

मुख्य बिंदु

इसके लिए विश्व के लगभग सभी देशों से तकरीबन 1400 प्रतिनिधि स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में एकत्रित हुए थे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में 12 दिन तक विचार-विमर्श किया गया।

संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा लगभग 180 सरकारों ने खतरनाक अपशिष्ट के नियंत्रण पर बसेल संधि 1989 में संशोधन के लिए समझौते पर सहमती प्रकट की। इसका उद्देश्य प्लास्टिक को विश्व के महासागर में जाने से रोकना है। यह समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी है, इसके लिए देशों को प्लास्टिक कचरे को मॉनिटर व ट्रैक करना पड़ेगा।

चिंताजनक स्थिति

गौरतलब है कि प्रतिवर्ष 8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा महासागरों में चला जाता है। अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों द्वारा मिश्रित विषैला प्लास्टिक कचरा एशियाई देशों को निर्यात किया जाता है। यह विकसित देश इस प्लास्टिक कचरे को एशियाई देशों में रीसायकल किये जाने का दावा करते हैं। परन्तु यह अधिकतर प्लास्टिक कचरा रीसायकल नहीं किया जा सकता है, इसे भूमि में दफनाया जाता है अथवा जलाया जाता है अन्यथा इसे सागर में फेंका जाता है।

बेसल संधि

1989 में स्विट्ज़रलैंड के बेसल में Conference of Plenipotentiaries (CoP) ने The Basel convention on the Control of Transboundary Movements of Hazardous Wastes and their Disposal को अंगीकृत किया था।

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