भारतीय वायुसेना में ब्रह्मोस युक्त सुखोई-30 MKI एयरक्राफ्ट के पहले स्क्वाड्रन ‘टाइगर शार्क्स’ 222  को शामिल किया गया

20 जनवरी, 2020 को भारतीय वायुसेना में ब्रह्मोस मिसाइल युक्त सुखोई-30 MKI एयरक्राफ्ट के पहले स्क्वाड्रन ‘टाइगरशार्क्स’ 222 को शामिल किया गया। इस नए स्क्वाड्रन को तमिलनाडु के तंजावुर में तैनात किया गया है।

पृष्ठभूमि

222 स्क्वाड्रन की शुरुआत सबसे पहले अम्बाला में 1969 में की गयी थी, इस स्क्वाड्रन को टाइगर शार्क्स के नाम से भी जाना जाता है। इस स्क्वाड्रन ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1985 में सर्वप्रथम टाइगर शार्क्स स्क्वाड्रन में मिग-27 लड़ाकू विमान शामिल किये गये थे।

टाइगर शार्क्स

देश भर में टाइगर शार्क्स की 12 स्क्वाड्रन हैं, यह स्क्वाड्रन तंजावुर, पुणे, हल्वारा, सिरसा, जोधपुर, तेजपुर, बरेली और चबुआ में तैनात हैं। टाइगरशार्क्स की इस नई स्क्वाड्रन को तमिलनाडु में तैनात किया गया है, इसका उद्देश्य हिन्द महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना है।

ब्रह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस एक माध्यम रेंज की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, इसे पनडुब्बी, समुद्री जहाज़, लड़ाकू विमान व ज़मीन से दागा जा सकता है। ब्रह्मोस रूस की NPO और भारत के DRDO के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। ब्रह्मोस मिसाइल 3 मैक (ध्वनि से तीन गुना तेज़) की गति से अपने लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है। वर्तमान में इसकी गति को 5 मैक तक करने पर कार्य किया जा रहा है। यह मिसाइल रूसी मिसाइल पी-800 ओनिक्स पर आधारित है। इस मिसाइल का नाम भारत की नदी ब्रह्मपुत्र और रूस की नदी मोस्कवा के नाम को मिलाकर ‘ब्रह्मोस’ रखा गया है। वर्तमान में ब्रह्मोस मिसाइल के हाइपरसोनिक संस्करण को विकसित किया जा रहा है, यह हाइपरसोनिक संस्करण 7-8 मैक की गति से लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी। फिलहाल यह हाइपरसोनिक संस्करण लगभग 2020 में परीक्षण के लिए तैयार होगा।

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