भारत में 1 अगस्त को मुस्लिम महिला अधिकार दिवस मनाया जा रहा है

ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित करने वाले कानून की पहली वर्षगांठ के अवसर पर, उस दिन को देश भर में मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में घोषित किया गया है।

ट्रिपल तलाक विधेयक को लोकसभा में 25 जुलाई, 2020 को पारित किया गया था। इसके अलावा, यह राज्य सभा द्वारा 30 जुलाई को पारित किया गया था। अंत में, राष्ट्रपति से मंज़ूरी मिलने के बाद यह देश में एक कानून बन गया।

ट्रिपल तलाक

ट्रिपल तलाक को “तालक-ए-बिद्दत” के रूप में भी जाना जाता है, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के अधिनियम द्वारा मुस्लिम पुरुषों को दिया गया एक विशेष प्रावधान था। इस कानून ने कानूनी रूप से ट्रिपल तालक की प्रथा को अनुमति दी, जिसने मुस्लिम पति को कुछ विशेष विशेषाधिकार दिए। इस कानून में ऐसे प्रावधान हैं जो पति को अपनी पत्नी के साथ तीन बार “तलाक” शब्द का उच्चारण करके सभी वैवाहिक संबंधों को रद्द करने की अनुमति देते हैं।

ट्रिपल तलाक अधिनियम

यह अधिनियम इस प्रकार के तलाक को कानूनी अपराध बनाता है। अधिनियम में आगे कहा गया है कि जो कोई भी व्यक्ति तीन तलाक पद्धति का पालन करेगा, उसे तीन साल की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा होगी। यह अपराध गैर-जमानती है और यह विवाहित महिला को अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने का अधिकार देता है।

प्रभाव

इस अधिनियम के लागू होने के बाद से देश में ट्रिपल तालक मामले में 82% की गिरावट देखी गई है। मंत्रालय के अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, जो विभिन्न वक्फ बोर्डों से एकत्र किए गए थे, 1985 से 2019 तक  ट्रिपल तालाक के लगभग 383,000 मामले भारत में दर्ज किए गए थे। जुलाई 2019 के नए अधिनियम के लागू होने के बाद, केवल 1,039 ट्रिपल तालक के मामले दर्ज किए गए।

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