रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए सर्वेक्षण वेसल के लिए GRSE के साथ किया समझौता

केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE), कलकत्ता के साथ 4 सर्वेक्षण वेसल के निर्माण के लिए 2,435.15 करोड़ रुपये का समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट को 54 महीनों में पूरा किया  लिया जायेगा। इस समझौते के तहत पहले वेसल की प्राप्त 36 महीने बाद होगी, जबकि शेष वेसल प्रत्येक 6-6 माह बाद प्राप्त होंगे।

मुख्य बिंदु

  • यह सर्वेक्षण वेसल 110 मीटर लम्बा होगा, इसकी जल विस्थापन क्षमता 3,300 टन है।
  • इस वेसल में आधुनिक हाइड्रोग्राफ़िक उपकरणों तथा सेंसर का उपयोग किया जायेगा। इसमें एक एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर के लिए हेल्लो हेंगर की व्यवस्था भी होगी।
  • इन वेसल का निर्माण क्लासिफिकेशन सोसाइटी रूल्स व नेवल शिप रेगुलेशन के तहत किया जायेगा। यह वेसल अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के प्रदूषण मानकों के अनुकूल होंगे।

उपयोग

  • इन वेसल का उपयोग बंदरगाहों, नेविगेशन चैनल तथा मार्गों के तटीय व गहन जल हाइड्रोग्राफ़िक सर्वेक्षण के लिए किया जायेगा।
  • इनका उपयोग विशेष आर्थिक आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सीमा तक सर्वेक्षण के लिए किया जायेगा, इनका उपयोग रक्षा उपयोग के लिए समुद्री तथा भूगर्भिक डाटा के एकत्रीकरण के लिए किया जायेगा।
  • इसके अतिरिक्त यह वेसल सीमित रक्षा व बचाव कार्य, समुद्री शोध इत्यादि के लिए भी किया जायेगा।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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