लोक सभा ने पारित किया भगौड़ा आर्थिक अपराधी बिल, 2018

लोकसभा ने भगौड़ा आर्थिक अपराधी बिल, 2018 बिल पारित किया, इसका उद्देश्य उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसना है जो देश के कानून से बचने के लिए भागकर अन्य देश में शरण ले लेते हैं। यह बिल अप्रैल 2018 में में राष्ट्रपति द्वारा लागू किये गए अध्यादेश का स्थान लेगा।

बिल की मुख्य विशेषताएं

भगौड़ा आर्थिक अपराधी : भगौड़ा आर्थिक अपराधी वह व्यक्ति है जिसे विरुद्ध आर्थिक अपराध (इस कानून द्वारा बनायी गयी आर्थिक अपराधों की सूची) करने के लिए भारत के लिए न्यायालय ने वारंट जारी किया जाये और वह व्यक्ति कानून से बचने के लिए विदेश भाग जाये अथवा भारत वापस आने के लिए मना करे। यह उन मामलों में लागू होगा जिसमे आर्थिक अपराध की राशि 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक हो।

विशेष न्यायालय : धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित विशेष न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति को भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा सकता है। जब्त की गयी सम्पति की निगरानी के लिए न्यायालय द्वारा एक प्रशासक की नियुक्ति की जाएगी। यह जब्त की कई संपत्ति के द्वारा ऋणदाताओं को भरपाई की जाएगी।

संपत्ति को ज़ब्त करना : इस बिल के द्वारा धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002याचिक के तहत नियुक्त किये गए निदेशक अथवा उपनिदेशक को विशेष न्यायालय के आज्ञा पत्र के आधार पर अपराधी की संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार किया गया है। संपत्ति को विशेष न्यायालय की अनुमति के बिना अस्थायी तौर पर 30 दिनों के लिए ज़ब्त किया जा सकता है।

याचिका दायर करने अथवा सिविल दावे बचाव पर मनाही :  इस बिल के द्वारा किसी नागरिक न्यायालय को यह शक्ति दी गयी है कि वह किसी भगौड़ा आर्थिक अपराधी के याचिका दायर करने अथवा सिविल दावे के बचाव करने पर रोक लगा सकता है। यदि वह व्यक्ति किसी कंपनी में शेयरहोल्डर, प्रमोटर अथवा कंपनी में किसी महत्वपूर्ण पद पर काबिज़ है तो ऐसे में कंपनी को याचिका दायर करने अथवा सिविल दावे के बचाव से करने में अपात्र माना जायेगा।

निदेशक की शक्तियां : निदेशक और उप-निदेशक में न्यायालय में निहित शक्तियां होंगी। इन शक्तियों के द्वारा निदेशक किसी भगौड़े आर्थिक अपराधी के घर व दफ्तर इत्यादि में छापा मारने तथा दस्तावेज ज़ब्त करने के आदेश दे सकते हैं।

अपील : विशेष न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय में की जा सकती है।

पृष्ठभूमि

हाल ही में आर्थिक अपराधों के कई गंभीर मामले सामने आये हैं, इसमें विजय माल्या और नीरव मोदी के केस प्रमुख हैं। वे आर्थिक अपराधियों ने कानूनी कार्यवाई से बचने के लिए विदेश भाग गए। बैंक से लिए गए ऋण को न चुकाने के कारण बैंकों की आर्थिक स्थिति भी काफी ख़राब हो रही है। इस तरह के मामलों से निपटने के लिए उपयुक्त क़ानून न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध उचित करवाई संभव नहीं थी। इस बिल की सहायता से भगौड़े आर्थिक अपराधियों को काबू किया जा सकता है।

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