2018 में कार्बन उत्सर्जन में 2% की वृद्धि हुई: अध्ययन

यूनाइटेड किंगडम बेस्ड तेल व गैस कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने हाल ही में “The BP Statistical Review of World Energy” नामक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में कार्बन उत्सर्जन में 2% की वृद्धि हुई। यह 2010-11 के बाद होने वाली सबसे ज्यादा वृद्धि है।

मुख्य बिंदु

इस रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए काफी कम प्रयास किये गये हैं। उर्जा मांग तथा कार्बन उत्सर्जन में अत्याधिक वृद्धि हो रही है।

वैश्विक उर्जा मांग में 2.9% की वृद्धि हुई, इस मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका में शेल रिज़र्व का अधिक दोहन किया गया। 2018 में नवीकरणीय  उर्जा के उपयोग में 14.5% वृद्धि हुई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार हरित/ नवीकरणीय उर्जा के द्वारा शुद्ध-शून्य ग्रीन हाउस उत्सर्जन को प्राप्त करना काफी मुश्किल है। इसलिए सरकारों को कोयला व तेल से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में कार्य करना होगा।

The BP Statistical Review of World Energy

इसे उर्जा उद्योग का मानक माना जाता है। इसमें देशों के तेल भंडार के आकार, नवीकरणीय उर्जा के उत्पादन तथा विभिन्न उपभोग दरों का वर्णन किया जाता है।

विश्व में सभी देशों में सरकारें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए डेडलाइन्स सेट कर रही हैं। ब्रिटेन की टॉप एडवाइजरी बॉडी ने ब्रिटिश सरकार के लिए 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य रखने की अनुशंसा की है। इसे कई यूरोपीय सरकारों द्वारा अपनाया गया है।

अमेरिका में 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य बनाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। परन्तु यह लक्ष्य काफी मुश्किल है।

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