विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर रोक लगाने से इनकार किया

सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायधीश ने केंद्र सरकार को इस अधिनियम के बारे में लोगों को अवगत करवाने के लिए कहा है ताकि लोगों में किसी प्रकार का असमंजस न रहे।

संसद द्वारा नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019  के द्वारा नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। गौरतलब है कि इस विधेयक को भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में काफी बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के चलते असम के कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है तथा कई स्थानों पर इन्टरनेट सेवा पर रोक लगाई गयी है।

मुख्य बिंदु

  • इस बिल के द्वारा बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के प्रताड़ित हिन्दू, जैन, सिख, इसाई, बौद्ध तथा पारसी नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी।
  • यह बिल देश के सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगा, इस बिल के लाभार्थी व्यक्ति देश की किसी भी भाग में रह सकते हैं।
  • इस बिल के द्वारा उन लोगों को काफी राहत मिलेगी जो पड़ोसी देशों से आकर गुजरात, राजस्थान, दिल्ली मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों में रह रहे हैं।

नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार अवैध आप्रवासियों को या तो जेल में भेजा जा सकता है अथवा उन्हें उनके देश में वापस भेजा जा सकता है।

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लोकसभा ने पारित किया केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बिल, 2019

हाल ही में लोकसभा ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बिल, 2019 पारित किया, इसके द्वारा के तीन संस्कृत विश्वविद्यालयों को केन्द्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया जाएगा।

बिल की विशेषताएं

इस बिल के द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (भोपाल), श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (नई दिल्ली) तथा राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (तिरुपति, आंध्र प्रदेश) को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। यह विश्वविद्यालय छात्रों को संस्कृत शिक्षा प्रदान करते हैं।

विश्व भर में 100 देशों के 250 से अधिक विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा पढ़ाई जाती है। गौरतलब है कि जर्मनी के 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

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