विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

संसद ने पारित किया विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) बिल, 2019

संसद ने हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) बिल, 2019 को पारित किया, इसके द्वारा ट्रस्टों को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में इकाई स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गयी। यह 17वीं लोकसभा द्वारा पारित किया जाने वाला पहला कानून था। इस विधेयक ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश 2019 का स्थान लिया है, इस अध्यादेश को मार्च, 2019 में लागू किया गया था। इस विधेयक के द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 में संशोधन किया गया है।

मुख्य बिंदु

इस विधेयक में विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के सेक्शन 2 (v) में “व्यक्ति” की परिभाषा में संशोधन किया गया है, इसमें “ट्रस्ट” को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट के अलावा उन इकाइयों को भी शामिल किया गया है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जा सकता है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के सेक्शन 2 (v) के अनुसार किसी “व्यक्ति” द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है। इस अधिनियम में “व्यक्ति” को भारत के निवासी अथवा अप्रवासी, हिन्दू अविभाजित परिवार, कोआपरेटिव सोसाइटी, कंपनी, फर्म इत्यादि को शामिल किया गया है।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

लोकसभा में प्रस्तुत किया गया ट्रिपल तलाक बिल

हाल ही में लोकसभा ने ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार) संरक्षण  बिल प्रस्तुत किया गया। विपक्षी दलों द्वारा इस बिल पर असहमति प्रकट की गयी है।

मुख्य बिंदु

ट्रिपल तलाक के लिए आरोपी पुरुष को तीन साल कारावास की सजा दी जा सकती है। इसका दुरूपयोग रोकने के लिए जमानत की व्यवस्था भी है। ट्रिपल तलाक का मामला तभी संज्ञान लेने योग्य होगा जब पीड़ित अथवा उसके सगे-सम्बन्धियों द्वारा FIR दर्ज करवाई जायेगी। ऐसे मामले में केवल पीड़ित के आग्रह पर ही समझौता किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पीड़ित अपने अल्पव्यस्क बच्चों की कस्टडी भी ले सकती है और इसके लिए उसे गुज़ारा भत्ता भी देय होगा।

पृष्ठभूमि

अगस्त, 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक की इस्लामिक प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया था। इस प्रथम के तहत मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी को केवल तीन बार तलाक शब्द बोलकर तलाक दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक को धार्मिक परंपरा के अभिन्न हिस्सा होने की दलील को भी अस्वीकार किया। इस पर कानून बनाने के लिए सरकार ने मुस्लिम महिला (विवाह सम्बन्धी अधिकारों की सुरक्षा) बिल, 2017 लोक सभा में दिसम्बर, 2017 में पारित किया था।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

Advertisement