विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

125वां संवैधानिक संशोधन

केंद्र सरकार ने संसद में 125वां संवैधानिक संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया है, इसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी भारत में 10 स्वायत्त परिषदों की वित्तीय तथा कार्यकारी शक्तियों में वृद्धि करना है।

संशोधन विधेयक की विशेषताएं

इस संशोधन विधेयक से असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के लगभग 1 करोड़ जनजातीय लोग प्रभावित होंगे, इस विधेयक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :

  • असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा को अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए अनुच्छेद 280 में संशोधन किया जाएगा, इससे स्वायत्त परिषद् अधिक विकास के कार्य कर सकेंगीं।
  • मौजूदा स्वायत्त जिला परिषदों का नाम बदलकर स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद् किया जाएगा क्योंकि इन परिषदों का क्षेत्राधिकार एक जिले से अधिक होगा।
  • असम में कारबी आंगलोंग स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद् तथा दिमा हसाओ स्वायत्त परिषद् के क्षेत्राधिकार में 30 अन्य विषयों को शामिल किया जायेगा।
  • निम्न स्तर पर भी लोकतंत्र को मज़बूत बनाने के लिए निर्वाचित ग्रामीण म्युनिसिपल परिषद् के लिए भी संशोधन प्रस्तावित है।
  • संशोधन के द्वारा ग्रामीण परिषदों को आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय इत्यादि कार्य के लिए शक्तियां दी जायेंगी। यह शक्तियां कृषि, भूमि सुधार, सिंचाई जल प्रबंधन, पशु पालन, ग्रामीण विद्युतीकरण, छोटे स्तर के उद्योग तथा सामाजिक वानिकी इत्यादि कार्य के लिए दी जायेंगी।

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“टू चाइल्ड पालिसी” के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी

सर्वोच्च न्यायालय में दो बच्चों की नीति के पक्ष में अश्विनी उपाध्याय नामक वकील ने याचिका दायर की है। इस याचिका में सरकारी नौकरी, सहायता तथा अनुदान का लाभ उठाने के लिए दो बच्चों के नियम को अनिवार्य करने की प्रार्थना की गयी है। इस याचिका की मुख्य अपीलें निम्नलिखित हैं :

  • इस नियम का पालन न करने पर नागरिकों के वैधानिक अधिकार जैसे वोट देने का अधिकार तथा चुनाव लड़ने का अधिकार छीन लिए जाएँ।
  • जनसँख्या विस्फोट के बारे में जागरूकता फैलाने तथा निर्धन वर्ग के लोगों में गर्भरोधक दवाएं, निरोध, वैक्सीन इत्यादि वितरित करने के लिए प्रत्येक माह के पहले रविवार को “स्वास्थ्य दिवस” के रूप मनाया जाये।
  • सभी नागरिकों के लिए विवाह की आयु 21 वर्ष की जाए।
  • संविधान के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग की 24वीं अनुशंसा का क्रियान्वयन किया जाए, इस अनुशंसा में शिक्षा तथा लघु परिवार नियम के द्वारा जनसँख्या नियंत्रण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।
  • स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए दो बच्चों की नीति को लागू किया जाए। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान तथा हरियाणा में इस नीति के कारण बेहतर परिणाम आये हैं और जनसँख्या वृद्धि दर में कमी आई है।
  • जन प्रतिनिधि न केवल जनता के सेवक हैं बल्कि कानून के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें स्वयं दो बच्चों वाली नीति का पालन करते हुए उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। इससे देश के लोगों को प्रेरणा मिलेगी।

इस अपील में तर्क दिया गया है कि भारत जनसँख्या नीति लागू करने वाला विश्व का पहला देश है, परन्तु सरकार की लापरवाही के कारण अभी तक जनसँख्या के नियंत्रण को लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया जा सका है।

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