विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

केन्द्रीय कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन को मंज़ूरी दी। इसके पश्चात् संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) बिल, 2018 संसद में पेश किया जायेगा।

अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन

  • संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) बिल, 2018 के द्वारा अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में निम्नलिखित बदलाव किये जायेंगे :
  • नोकते, तंग्सा, तुत्सा और वांचो अनुसूचित जनजाति को अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की सूची में क्रम संख्या 10 में शामिल किया जायेगा।
  • “अबोर” को क्रम संख्या 1 से हटाया जायेगा, क्योंकि यह क्रम संख्या 16 में “आदि” के समान ही है।
  • क्रम संख्या 6 में खाम्प्टी के स्थान पर ताई खामती का उपयोग किया जायेगा।
  • क्रम संख्या 8 में मिश्मी-कमन (मिजू मिश्मी), इदु (मिश्मी) तथा ताराओं (दिगारू मिश्मी) को शामिल किया जायेगा।
  • क्रम संख्या 9 में “मोम्बा” के स्थान पर मोनपा, मम्बा, सारतंग और साजोलोंग को शामिल किया जायेगा।

अनुसूचित जनजाति की सूची में संशोधन करने की प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 (1) के तहत राष्ट्रपति के पास किसी जाति, नस्ल, जनजाति, किसी जाति अथवा नस्ल के समूह को चिन्हित करने की शक्ति है। इस सूची में संशोधन के लिए बाद में संसद में कानून पारित करना पड़ता है।

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संसद ने पारित किया राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (संशोधन) बिल, 2018

राज्य सभा की मंज़ूरी के बाद ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) बिल, 2018 पारित किया गया। इससे उन शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा फण्ड दिए जाते हैं, परन्तु उन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है। इस बिल से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् अधिनियम, 1993 में संशोधन किया गया है।

बिल की मुख्य विशेषताएं

शिक्षक शिक्षा संस्थानों को पूर्वव्यापी (retrospective) मान्यता : इस बिल के द्वारा उन सभी संस्थानों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है, परन्तु उन्हें मान्यता नहीं दी है। इसमें केवल उन्ही शिक्षण संस्थानों को शामिल किया जायेगा जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से पहले शिक्षक शिक्षा के कोर्स चलाये हों।

नए कोर्स शुरू करने की पूर्वव्यापी आज्ञा : इस बिल के द्वारा इन शिक्षक शिक्षा संस्थानों को ने कोर्स शुरू करने की आज्ञा भी प्रदान की गयी है।

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (National Council for Teacher Education)

यह केंद्र सरकार की एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1995 में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् अधिनियम, 1993 द्वारा की गयी थी। इसका मुख्य कार्य भारतीय शिक्षा प्रणाली के मानक व प्रक्रियाओं इत्यादि का अवलोकन करना है। NCTE शिक्षक शिक्षा के विकास के लिए योजनायें निर्मित करता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित हैं।

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