विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

कर्नाटक में परिवारा और तलवार समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने की कैबिनेट ने मंजूरी दी |

कर्नाटक की अनुसूचित जनजातियों की सूची में नायका के नाम के रूप में ‘पारवरा और तलवार’ समुदायों को शामिल करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह अनुमोदन कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति को दर्जा देने के लिए इन समुदायों की दीर्घकालिक मांग को पूरा करता है। इसके साथ, इन समुदायों से संबंधित व्यक्ति कर्नाटक से एसटी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे। वे राज्य के लिए सभी लाभों के लिए भी योग्य होंगे।

पृष्ठभूमि

अनुसूचित जनजाति संविधान की धारा 342 के तहत अधिसूचित हैं। कर्नाटक सरकार ने राज्य के ‘नायका’ के सामान पारवरा और तलवार समुदायों को शामिल करने की सिफारिश की थी। यह विशेष राज्य / संघीय क्षेत्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, तथा संबंधित राज्य सरकार / संघ शासित प्रदेशों के परामर्श के बाद अधिसूचित आदेश के अनुसार किया गया है । वर्तमान में अनुसूचित जनजातियों की सूची में बाद में शामिल किए जाने या बहिष्करण या अन्य संशोधनों को संसद के अधिनियम में संशोधन के जरिए ही बनाया जा सकता है।

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लोकसभा में ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक 2017 पास |

ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक 2017 लोकसभा में पास हो गया है। बिल के पास होने से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा। प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों को 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रेच्‍युटी मिल सकेगी। सरकार के कर्मचारियों के लिए पहले ही 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रेच्‍युटी का प्रावधान है। लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2017 को पारित करने के लिये पेश किया। विपक्षी सदस्‍यों ने बहस और मत विभाजन की मांग की थी, लेकिन हंगामे के बीच बिल को बिना बहस के ही ध्‍वनिमत से पारित कर दिया गया।

क्या है ग्रेच्युटी

यह आपके वेतन, यानी आपकी सैलरी का वह हिस्सा है, जो कंपनी या आपका नियोक्ता, यानी एम्प्लॉयर आपकी सालों की सेवाओं के बदले देता है। यह वह लाभकारी योजना है, जो रिटायरमेंट लाभों का हिस्सा है, और नौकरी छोड़ने या खत्म हो जाने पर कर्मचारी को कंपनी द्वारा दिया जाता है। कब मिलेगी-ग्रेच्युटी किसी भी ऐसे कर्मचारी को दी जानी होती है, जो नौकरी में लगातार 4 साल, 10 महीने, 11 दिन तक काम कर चुका हो। ऐसे कर्मचारी की सेवा को पांच साल की अनवरत सेवा माना जाता है, और आमतौर पर पांच साल की सेवाओं के बाद ही कोई भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता है।

टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 10 से 20 लाख

संगठित क्षेत्र में 5 साल या इससे ज्यादा अवधि तक नौकरी कर चुके कर्मचारी नौकरी छोड़ने या रिटायर होने के बाद 10 लाख रुपये तक की टैक्स फ्री ग्रेच्युटी के योग्य माने जाते हैं। इस बिल के कानून बन जाने के बाद यह सीमा दुगुनी हो जाएगी। सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया।
पहले ग्रेच्युटी की टैक्स फ्री सीमा 2010 में तय की गई थी। तब से लेकर अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन लोकसभा में इस बिल के पास होने के बाद टैक्स फ्री ग्रेच्युटी का 20 लाख रुपये होने का रास्ता साफ हो गया है।

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