विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

लोक सभा ने पारित किया ट्रिपल तलाक पर बिल

हाल ही में लोकसभा ने ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार) संरक्षण  बिल, 2019 पारित किया। इस बिल को लोकसभा में केन्द्रीय विधि मंत्री रवि शंकर ने रखा था। इस बिल के पक्ष में 303 वोट पड़े।

मुख्य बिंदु

ट्रिपल तलाक के लिए आरोपी पुरुष को तीन साल कारावास की सजा दी जा सकती है। इसका दुरूपयोग रोकने के लिए जमानत की व्यवस्था भी है। ट्रिपल तलाक का मामला तभी संज्ञान लेने योग्य होगा जब पीड़ित अथवा उसके सगे-सम्बन्धियों द्वारा FIR दर्ज करवाई जायेगी। ऐसे मामले में केवल पीड़ित के आग्रह पर ही समझौता किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पीड़ित अपने अल्पव्यस्क बच्चों की कस्टडी भी ले सकती है और इसके लिए उसे गुज़ारा भत्ता भी देय होगा।

पृष्ठभूमि

अगस्त, 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक की इस्लामिक प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया था। इस प्रथम के तहत मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी को केवल तीन बार तलाक शब्द बोलकर तलाक दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक को धार्मिक परंपरा के अभिन्न हिस्सा होने की दलील को भी अस्वीकार किया। इस पर कानून बनाने के लिए सरकार ने मुस्लिम महिला (विवाह सम्बन्धी अधिकारों की सुरक्षा) बिल, 2017 लोक सभा में दिसम्बर, 2017 में पारित किया था। परन्तु विपक्षी दलों से सहमती न बनने यह बिल राज्य सभी में अभी लटका हुआ है।

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संसद ने पारित किया सूचना का अधिकार (संशोधन) बिल, 2019

संसद ने सूचना का अधिकार (संशोधन) बिल, 2019 पारित कर दिया है, लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 218 मत पड़े जबकि इसके विरोध में 79 मत पड़े। अब इस बिल को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया है, राज्यसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK, RJD, AAP इत्यादि ने वाकआउट किया। विपक्ष इस बिल को सेलेक्ट समिति को भेजने की मांग कर रहा था।

मुख्य बिंदु

इस बिल के द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में कुछ एक व्यवस्थाओं में संशोधन किया जायेगा। इस बिल के द्वारा केंद्र सरकार को मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्त के कार्यकाल, वेतन व भत्ते तथा सेवा के नियम व शर्तों में निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की जायेगी।

बिल की विशेषताएं

सेवा के नियम व शर्तें : इस बिल के द्वारा केंद्र सरकार को मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों के कार्यकाल पर निर्णय  करने की शक्ति मिलेगी। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार केन्द्रीय स्तर पर मुख्य सूचना आयुक्त तथा राज्य स्तर पर सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

वेतन : इस बिल के मुताबिक मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों के वेतन व भत्ते केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किये जायेंगे। सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों को दिया जाने वाला वेतन मुख्य चुनाव तथा चुनाव आयुक्तों के समान होगा।

वेतन में कटौती : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के समय यदि वे पूर्व में की गयी सरकारी सेवा के लिए पेंशन अथवा अन्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं, तो उनके वेतन में पेंशन के बराबर की राशि कमी की जायेगी। सूचना का अधिकारी (संशोधन) बिल, 2019 के द्वारा इस प्रावधान को हटाया जायेगा।

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