विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2017

केन्द्रीय सड़क परिवहन व उच्चमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा है कि केंद्र सरकार का अनुमान सड़क दुर्घटनाओं में 20% की कमी करना है, इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2017 काफी उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

बिल की विशेषताएं

  • इस बिल में ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन प्राप्त करने की व्यवस्था ऑनलाइन की जायेगी। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट ऑटोमेटेड होंगे, जबकि लर्नर लाइसेंस ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकेगा।
  • इस बिल के द्वारा ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लगने वाले जुर्माने में वृद्धि की जायेगी।
  • नए नियम के अनुसार 30 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को जारी किया ड्राइविंग लाइसेंस केवल 40 वर्ष की आयु तक ही वैध होगा। 30 से 50 आयुवर्ग के जिन लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया गया है, उनका लाइसेंस 10 वर्ष तक ही वैध रहेगा। 50 से 55 वर्ष के लोगों को जारी किया गया ड्राइविंग लाइसेंस 60 वर्ष की आयु तक वैध रहेगा। 55 से अधिक की आयु के व्यक्ति के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता 5 वर्ष होगी।
  • इस बिल के मुताबिक यदि वाहन में कोई खराबी होती है अथवा यह चालक, लोगों अथवा पर्यावरण के लिए खतरनाक है, तो वाहन निर्माता को वाहन के लिए अदा की गयी रकम वापस करनी होगी अथवा ख़राब वाहन के स्थान पर नया वाहन उपलब्ध करवाना होगा। इस प्रकार की घटना में कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इस बिल को लोकसभा द्वारा पारित कर दिया गया है, परन्तु यह बिल अभी राज्यसभा में लंबित पड़ा है।

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जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में संशोधन

भारतीय चुनाव आयोग जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य मतदान से 48 घंटे पहले प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया तथा अन्य डिजिटल प्लेटफार्म पर चुनावी विज्ञापनों पर रोक लगाना है।

यह संशोधन आवश्यक क्यों है?

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुच्छेद 126 के अनुसार मतदान से 48 घंटे के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर कोई राजनीतिक विज्ञापन नहीं चलाया जा सकता है।

48 घंटे के दौरान समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए पूर्व-प्रमाणीकरण लेना चुनाव आयोग ने अनिवार्य बनाया है। परन्तु चुनाव के परिणामों में सोशल  मीडिया की भूमिका काफी अधिक बढ़ गयी है। उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा था कि सेक्शन 126 के द्वारा टेलीविज़न चैनल पर राजनीतिक विज्ञान पर प्रतिबन्ध लगाया गया है, परन्तु प्रिंट मीडिया में विज्ञापन जारी रहते हैं।

भारतीय चुनाव आयोग ने सेक्शन 126 के दायरे में डिजिटल और प्रिंट मीडिया को लाने के लिए केन्द्रीय विधि मंत्रालय को पत्र लिखा है।

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