विधि एवं विधेयक करेंट अफेयर्स

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2018 में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार किया

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन बिल, 2018 में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार किया। यह संशोधन इस अधिनियम के दुरूपयोग को रोकने के लिए लाये गये थे।

प्रस्तावित संशोधन

अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) अधिनियम के कई प्रावधानों के दुरूपयोग पर चिंता ज़ाहिर करने हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित सुरक्षा मैकेनिज्म का सुझाव दिया था :

  • अग्रिम ज़मानत की व्यवस्था
  • अधिनियम के तहत आरोपी की गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति
  • केस की प्रारंभिक छानबीन डिप्टी पुलिस अधीक्षक द्वारा की जायेगी

अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2018

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (क्रूरता रोकथाम) अधिनियम, 1989 के द्वारा उपेक्षित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रावधान किये गए हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति के विरुद्ध अपराधों के लिए एक विशेष ट्रायल कोर्ट की स्थापना की गयी है।

इस बिल के अनुसार आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए जांच अधिकारी को किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा आरोपी पर FIR दायर करने के लिए प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है। इस अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती।

इस अधिनियम का उद्देश्य उपेक्षित वर्ग को न्याय दिलाना है। इस अधिनियम में 22 अपराध की सूची हैं, जिनसे अनुसूचित जाति व जनजाति के आत्म सम्मान को ठेस पहुँच सकती है। यदि किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के तहत दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कारवाई अमल में लायी जाती है।

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केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, 2019 लागू किया

केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को लागू कर दिया है। हालांकि कंपनी (संशोधन) बिल, 2018 को लोक सभा में पारित कर दिया गया था, परन्तु राज्यसभा में यह बिल लटका हुआ है। इससे पहले नवम्बर में इस अध्यादेश को पारित किया गया था। इस अध्यादेश की मियाद 21 जनवरी को समाप्त हो रही थी। इसलिए केंद्र सरकार ने पुनः इस अधिनियम को लागू कर दिया।

मुख्य बिंदु

इस अध्यादेश का उद्देश्य कंपनी अधिनियम के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (NCLT) के कार्यभार को कम करना है। इस अध्यादेश के द्वारा इसके 90% मामलों को NCLT से केन्द्रीय कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय कार्यालयों को स्थानांतरित किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट मामले सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था, इस समिति ने कंपनी अधिनियम के कई बदलाव करने की सिफारिश की थी। इस समिति ने कॉर्पोरेट अपराधों के पुनर्गठन की सिफारिश की थी ताकि न्यायालय में केवल गंभीर अपराधों के मामले ही भेजे जा सकें। इससे NCLT के लंबित पड़े मामलों में कमी आएगी। इसके तहत कंपनी के निर्देशकों की सीमा निश्चित करने की सिफारिश भी की गयी है।

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