अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.8 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 476.475 अरब डॉलर पर पहुंचा

10 अप्रैल, 2020 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.815 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 476.475 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत 8वें स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है।

विदेशी मुद्रा भंडार

इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये परन्तु इसमें विशेष आहरण अधिकारों , सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थितियों को शामिल किया जाता है। इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भंडार अथवा अंतर्राष्ट्रीय भंडार की संज्ञा देना अधिक उचित है।

10 अप्रैल, 2020 को विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए): $440.338 बिलियन
गोल्ड रिजर्व: $ 31.136 बिलियन
आईएमएफ के साथ एसडीआर: $ 1.424 बिलियन
आईएमएफ के साथ रिजर्व की स्थिति: $ 3.578 बिलियन

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आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट घटाकर 3.75% किया

17 अप्रैल, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक ने 3 मई, 2020 तक लॉक डाउन को बढ़ाए जाने के बाद उपायों की की घोषणा की। भारतीय रिज़र्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को 3.75% तक घटा दिया है। जबकि रेपो रेट को 5.15% से 4.4% कर दिया गया है। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (LTRO) के लिए 50,000 करोड़ रुपये की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु

भारतीय रिज़र्व बैंक ने तरलता कवरेज अनुपात (LCR) को 100% से 80% तक कम कर दिया है। एलसीआर बैंकों द्वारा धारित परिसंपत्तियां हैं जो यह सुनिश्चित करती हैं कि यह अल्पकालिक दायित्वों को पूरा करने सक्षम है।

भारतीय रिज़र्व बैंक SIDBI, NABARD, NHB जैसे संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लॉक डाउन होने के कारण ये संस्थान बाजार से नए संसाधन नहीं जुटा पा रहे हैं।

LTRO 2.0

इस बार LTRO को LTRO 2.0 नाम दिया गया है, क्योंकि इस बार LTRO में सूक्ष्म वित्त और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों  की तरलता जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।

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