अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.73 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 487.04  अरब डॉलर पर पहुंचा

15 मई, 2020 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.73 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 487.04 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत 8वें स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है।

विदेशी मुद्रा भंडार

इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये परन्तु इसमें विशेष आहरण अधिकारों , सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थितियों को शामिल किया जाता है। इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भंडार अथवा अंतर्राष्ट्रीय भंडार की संज्ञा देना अधिक उचित है।

15 मई, 2020 को विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए): $448.67 बिलियन
गोल्ड रिजर्व: $ 32.91 बिलियन
आईएमएफ के साथ एसडीआर: $ 1.42 बिलियन
आईएमएफ के साथ रिजर्व की स्थिति: $ 4.04 बिलियन

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भारत सरकार ने सामान्य वित्तीय नियमों में संशोधन किया

21 मई, 2020 को भारत सरकार ने सामान्य वित्तीय नियमों में संशोधन किया, यह सुनिश्चित करने के लिए कि 200 करोड़ रुपये से कम मूल्य की वस्तुएं और सेवाएं घरेलू फर्मों से खरीदी जाएँ।

मुख्य बिंदु

केंद्र सरकार द्वारा GFR 2017 (सामान्य वित्तीय नियम) में संशोधन किया गया है। नए संशोधन के तहत, 200 करोड़ रपये से कम की सरकारी खरीद  में वैश्विक निविदाओं रोक दिया जाएगा । इसकी घोषणा आत्म निर्भर  भारत अभियान के तहत की गयी थी।

सामान्य वित्तीय नियम (GFR)

सामान्य वित्तीय नियम सार्वजनिक वित्त से सम्बंधित नियमों का समूह है। सामान्य वित्तीय नियम को पहली बार 1947 में जारी किया गया था और सभी मौजूदा आदेशों को एक साथ लाया गया था।  जीएफआर को 1963 और 2005 में संशोधित किया गया था।

जीएफआर 2017

जीएफआर 2017 को 2017 में संशोधित किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई संगठन लचीलेपन से समझौता किए बिना अपने व्यवसाय का प्रबंधन करता है।

वैश्विक टेंडर

टेंडरिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे  किसी परियोजना के लिए बोलियाँ स्वीकार की जाती हैं। वैश्विक टेंडरिंग विदेशों से या विदेशी निवेश के माध्यम से होती है। “वैश्विक टेंडर को खारिज करना” स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी निवेश को एक विशेष सीमा तक रोक रहा है।

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