अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

उर्जा क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स के लिए लांच किया गया इन्टेग्रेट टू इनोवेट प्रोग्राम

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के अंतर्गत इन्वेस्ट इंडिया द्वारा उर्जा क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स के लिए इन्टेग्रेट टू इनोवेट प्रोग्राम लांच किया। यह त्रैमासिक प्रोग्राम है, इस प्रोग्राम में स्टार्ट-अप्स और बड़ी कंपनियां मिलकर काम करेंगी।

इन्टेग्रेट टू इनोवेट प्रोग्राम

इस प्रोग्राम में उर्जा क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को अपने आइडियाज को साकार करने के लिए कंपनियों का मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त होगा। बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के अवसार के साथ-साथ चुने गए स्टार्ट-अप्स को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। चुने गए स्टार्ट-अप्स को बड़ी कंपनियां टेक्नोलॉजी, मार्गदर्शन और अपने नेटवर्क के लिए संभावित ग्राहक उपलब्ध करवाएगी।

इन्वेस्ट इंडिया  

यह निवेश संवर्धन व सहायता के लिए भारत सरकार की एजेंसी है। इसका गठन औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में किया गया है। इसका उद्देश्य देश में संभावित निवेशकों को सहायता उपलब्ध करवाना है।

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केंद्र सरकार ने लॉन्च की सेवा भोज योजना

केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने सेवा भोज योजना लॉन्च की है। इस योजना का उद्देश्य परोपकारी धार्मिक संस्थानों (जो लोगों को निशुल्क भोजन प्रदान करते हैं) को विशिष्ट भोजन सामग्री खरीदने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है। इस योजना के तहत इन धार्मिक संगठनों द्वारा खरीदी गयी खाद्य सामग्री पर लगाया गया केन्द्रीय वस्तु व सेवा कर तथा अंतर्राज्य वस्तु व सेवा कर रिफंड किया जायेगा।

सेवा भोज योजना

इस योजना के तहत परोपकारी धार्मिक संस्थानों द्वारा खरीदी गयी खाद्य सामग्री पर लगाया गया CGST और IGST रिफंड किया जायेगा। इसका उद्देश्य उन धार्मिक संगठनों के वित्तीय बोझ कम करना है जो लोगों को भोजन, प्रसाद लंगर, भंडारा इत्यादि उपलब्ध करवाते हैं।

लाभार्थी : इसमें मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च, धार्मिक आश्रम,  दरगाह व मठ इत्यादि शामिल हैं जो महीने में कम से कम 5000 लोगों निशुल्क को भोजन उपलब्ध करवाते हैं। इन संस्थानों को यह ग्रांट आयकर अधिनियम के सेक्शन 10 (23BBA) के तहत दी जाएगी।

चुनाव : इसके लिए सभी धार्मिक व परोपकारी संस्थानों को नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण करवाना आवश्यक है, दर्पण पोर्टल से उन्हें विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। इसके बाद इन संस्थानों को संस्कृति मंत्रालय के CSMS पोर्टल में पंजीकरण करवाना होगा। तत्पश्चात सभी आवेदनों का परिक्षण एक समिति द्वारा किया जायेगा। इस समिति की सिफारिश के आधार पर इन संस्थानों को यह वित्तीय छूट के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा पंजीकृत किया जायेगा।

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