अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

केंद्र सरकार ने सोलर सेल आयात करने पर लगाया 25% संरक्षण शुल्क

केंद्र सरकार ने चीन और मलेशिया से सोलर सेल के आयात पर 25% संरक्षण शुल्क लगाया है। इसका उद्देश्य घरेलु सोलर सेल निर्माता सेक्टर की सहायता करना है। परन्तु इस निर्णय से उन प्रोजेक्ट्स में असर पड़ सकता है जो सस्ती सोलर उपकरण के लिए आयात पर निर्भर थे। भारत में  सोलर पैनल में उपयोग किये जाने वाले 90% सोलर सेल चीन और मलेशिया से आयात किये जाते हैं।

संरक्षण शुल्क सरकार द्वारा आयात पर लगाया जाता है, इसका उद्देश्य आयात के कारण देश के घरेलु क्षेत्र के निर्माताओं को होने वाले नुकसान से बचाना है। आम तौर पर यह एक अस्थायी शुल्क होता है, जिसे घरेलु सेक्टर को नुकसान की सम्भावना बचाने के लिए आयात पर लगाया जाता है।

मुख्य बिंदु

व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGR) से विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया, भारतीय सोलर सेल निर्माताओं से पत्र मिलने के बाद संरक्षण शुल्क लागू करने का फैसला लिया गया। 30 जुलाई, 2018 से लेकर 29 जुलाई, 2019 के बीच यह संरक्षण शुल्क लागू होगा, बाद में 30 जुलाई, 2019 के बाद 6 महीने के लिए इसे कम करके 20% किया जायेगा। इसके बाद अगले 6 महीने के लिए इसे कम करके 15% किया जायेगा। यह संरक्षण शुल्क केवल चीन और मलेशिया से आयात किये जाने वाले सोलर सेल पर लगाया गया है, किसी अन्य देश पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

घरेलु उद्योग के समक्ष चुनौतियाँ

भारत के घरेलु सेक्टर में लगभग आधा दर्ज़न सोलर सेल व मोड्यूल निर्माता है, इनकी कुल क्षमता लगभग 3000 मेगावाट है। यह देश की भारी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। आयात पर संरक्षण शुल्क लगाने से भारतीय सोलर उत्पादन की कीमत भी अब विदेशी सोलर उत्पादनों के समान होगी। इसके अलावा भारतीय सोलर निर्माता सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सौर उर्जा प्रोजेक्ट्स को आयात करने की बजाय सौर उपकरण को घरेलु निर्माताओं से प्राप्त करना होगा।

भारत के घरेलु सोलर उपकरण निर्माता सेक्टर द्वारा अपनी क्षमता का पूरा उपयोग का करने का कारण पुरानी टेक्नोलॉजी का उपयोग है। इसके अलावा भारत में उत्पादित किये गए सोलर उपकरण चीनी उपकरणों की तुलना में काफी महंगे हैं। विदेशी आयातित उत्पादों से मुकाबला करने के लिए भारतीय सोलर उपकरण निर्माता सेक्टर को नवीन तकनीक अपनानी होगी तथा कीमत को भी प्रतिस्पर्धात्मक स्तर पर रखना होगा।

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संकटग्रस्त थर्मल प्लांट्स को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने किया उच्च स्तरीय समिति का गठन

केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त थर्मल प्लांट (तापीय उर्जा सयंत्र) प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन कैबिनेट सचिव द्वारा किया जायेगा। इस समिति में रेल मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, उर्जा मंत्रालय, कोयला मंत्रालय तथा उर्जा क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाताओं के प्रतिनिधि शामिल हैं।

मुख्य बिंदु

यह समिति विभिन्न मुद्दों का अवलोकन करेगी, तथा तापीय उर्जा में निवेश का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के लिए उपाय सुझाएगी। इसके अलावा इंधन वितरण, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, उर्जा का विक्रय, समय पर भुगतान इत्यादि बिन्दुओं पर भी चर्चा की जाएगी। अभी तक तापीय उर्जा क्षेत्र में काफी सारी परिसंपत्ति व निवेश का उपयोग कुशलतापूर्वक नहीं हो पाया है। आगे चल कर तापीय उर्जा में NPA में वृद्धि न हो और निवेश का उपयोग किया जाए, यह इस समिति द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में उच्च स्तरीय पैनल के गठन का सुझाव दिया था। इसके अलावा जो थर्मल प्लांट दिवालिया होने की समस्या से नहीं जूझ रहे थे, उन्हें अन्य समस्याओं के समाधान के लिए 6 महीने का समय दिया गया था। यह रिपोर्ट जून 2018 में प्रस्तुत की गयी थी जब इलाहबाद उच्च न्यायालय ने उर्जा उत्पादकों की बात सुने बिना कोई भी एक्शन न लेने का आदेश दिया था।

उर्जा उत्पादकों ने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा फरवरी 2018 में जारी किये गये उस सर्कुलर को चुनौती दी थी, जिसमे दिवालियापन की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सख्त टाइमलाइम प्रस्तुत की गयी थी। इसके तहत बैंकों को 1 दिन देर होने पर ही ऋण सेवा को डिफ़ॉल्ट करार देने के लिए कहा गया था।

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