अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सार्वजनिक बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) श्रेणी में रखा

बिगड़ते प्रदर्शन के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 21 सरकारी बैंकों में से 11 सार्वजनिक बैंकों (पीएसबी) को अपने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा के तहत रखा है। पीसीए ढांचे के तहत तीन-चार अन्य सार्वजनिक बैंकों को लाए जाने की उम्मीद है।
पीसीए ढांचे में वर्त्तमान में मौजूद 11 बैंक हैं आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम), यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई के नियमों से नियामक को कुछ प्रतिबंधों की अनुमति मिल सकती है जैसे शाखा विस्तार को और लाभांश भुगतान को रोकना। किसी एक इकाई या क्षेत्र में यह बैंक की ऋण सीमा को सीमित भी कर सकता है। बैंकों पर लगाए जा सकने वाले अन्य सुधारात्मक कार्यों में विशेष लेखा परीक्षा, पुनर्गठन कार्य और वसूली योजना के सक्रियण शामिल हैं। बैंकों के प्रमोटरों को भी नए प्रबंधन को लाने के लिए कहा जा सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक पीसीए के तहत, बैंक के बोर्ड को स्थानांतरित कर सकता है।

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रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था के अनुमान हेतु सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आधारित पैमाने को अपनाया

रिजर्व बैंक ने फिर से अर्थव्यवस्था में वृद्धि अनुमान व्यक्त करने को लेकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आधारित पैमाने को अपना लिया है। वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही पद्यति को रिजर्व बैंक ने इसकी वजह बताया है। केंद्रीय बैंक ने इससे पहले आर्थिक वृद्धि मापने के लिए सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) पैमाने को अपनाया था।

मुख्य तथ्य

o सरकार ने जनवरी 2015 से जीवीए फॉर्म्युले को अपनाते हुए आर्थिक वृद्धि के अनुमान का विश्लेषण करना शुरू किया था । इसके साथ जनवरी से आधार वर्ष को बदलकर 2018 कर दिया गया ।

o अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करना जीडीपी पद्वति की तरफ लौटने की मुख्य वजह है। दुनियाभर में ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ही मापा जाता है। बहुपक्षीय संस्थानों ने भी इसी पद्यति को अपनाया हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक और निवेशक इसी पद्वति को लेकर विश्लेषण करते हैं। इससे एक दूसरे देश के साथ तुलना करने में भी आसानी होती है।’

o इस साल 15 जनवरी के बाद से केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने भी आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिये जीडीपी आंकड़ों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अप्रैल से शुरू हुए चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक की मुख्य नीतिगत रेपो दर को 6 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।जीडीपी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष के 6.6 प्रतिशत से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है।

जीवीए फॉर्म्युले में जहां उत्पादक या आपूर्ति पक्ष की तरफ से आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर पेश की जाती है वहीं जीडीपी नमूने में उपभोक्ता पक्ष या मांग के परिपेक्ष में आर्थिक गतिविधियों का अनुमान लगाया जाता है।

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