अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 461.16 अरब डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा

3 जनवरी, 2020 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.689 अरब  डॉलर की वृद्धि के साथ अपने सर्वोच्च स्तर 461.16 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत 8वें स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है।

विदेशी मुद्रा भंडार

इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये परन्तु इसमें विशेष आहरण अधिकारों , सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थितियों को शामिल किया जाता है। इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भंडार अथवा अंतर्राष्ट्रीय भंडार की संज्ञा देना अधिक उचित है।

3 जनवरी, 2020 को विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए): $427.949 बिलियन
गोल्ड रिजर्व: $ 28.058 बिलियन
आईएमएफ के साथ एसडीआर: $ 1.447 बिलियन
आईएमएफ के साथ रिजर्व की स्थिति: $ 3.703 बिलियन

 

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वित्त वर्ष 2020 में भारत की जीडीपी विकास दर 5% रहेगी : विश्व बैंक  

विश्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2020 में भारत की जीडीपी विकास दर 5% रहेगी। जबकि अगले वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर बढ़कर 5.8% होने के आसार हैं।

इससे पहले केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने हाल ही में 2019-20 के लिए सकल घरेलु उत्पाद के प्रथम अग्रिम अनुमान जारी किये। CSO के अनुमान के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी विकास दर 5% रहने का अनुमान है। यह अनुमान पिछले दो तिमाहियों पर आधारित है। 2018-19 में जीडीपी विकास दर 6.8% रही थी। इस वर्ष विनिर्माण सेक्टर में मंदी के कारण जीडीपी विकास दर में कमी आई है। 2019-20 के दौरान विनिर्माण सेक्टर की विकास दर 2% रही, जबकि पिछले वर्ष यह दर 6% थी।

विश्व बैंक

विश्व बैंक का मुख्यालय वाशिंगटन डी. सी. में है। इसकी स्थापना जुलाई 1945 को हुई थी। विश्व बैंक ऋण देने वाली एक ऐसी संस्था है जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों की अर्थ व्यवस्थाओं को एक व्यापक विश्व अर्थव्यवस्था में शामिल करना और विकासशील देशों में ग़रीबी उन्मूलन के प्रयास करना है। इसके कुल 189 सदस्य देश हैं। इसका आदर्श वाक्य “निर्धनता मुक्त विश्व के लिए कार्य करना” है।

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