अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

कैनरा बैंक पर पाँच माह की डि‍पोजि‍ट पाबंदी और 8 करोड़ रुपये का जुर्माना

ब्रिटेन के फाइनेंशियल आचरण प्राधिकरण (एफसीए) ने कैनरा बैंक की लंदन शाखा पर 8 करोड़ रुपये का जुर्माना और 5 महीने तक डि‍पोजि‍ट लेने पर पाबंदी लगाई है. जिसका कारण एंटी-मनी लॉन्‍डरिंग (एएमएल) नियमों का पालन न करना बताया गया है.

संबन्धित मुख्य बिन्दु

एक नोटिस के माध्यम से एफसीए का कहना है कि‍ कैनरा बैंक की लंदन शाखा पर 8,96,100 पाउंड (लगभग 8 करोड़) का जुर्माना लगाया गया है और साथ ही बैंक अभी 147 दिनों तक नए ग्राहकों से डि‍पोजि‍ट भी नहीं ले सकता. इस जुर्माने और पाबंदी के कारण को व्यक्त करते हुये एफसीए कहता है की बैंक ने नवंबर 2012 से जनवरी 2016 के बीच के समय में प्रबंधन और नियंत्रण प्रिन्सिपल 3 का उल्‍लंघन कि‍या है.

एफसीए यह भी बताता है कि‍ केनरा बैंक पर लगे जुर्माने को 30 फीसदी कम भी कर दिया गया है क्योंकि एफसीए की जांच के शुरुआती चरण में केनरा बैंक द्वारा सहयोग की सुनिश्चिति की गयी थी अन्यथा सहयोग न करने की दशा में यह जुर्माना 12,80,175 पाउंड और 210 दिनों तक डि‍पोजि‍ट पर प्रतिबंध लगना होता.

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आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 6.25% की

6 जून, 2018 को, आरबीआई की छह सदस्यी मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट (अल्पकालिक उधार दर) को 6.00% से बढ़ाकर 6.25% करने का फैसला लिया है. दूसरी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति के अनुसार, आरबीआई की वर्तमान रेपो रेट 6.25% जबकि रिवर्स रेपो रेट 6.00% है. हाल ही में हुई दरों में यह वृद्धि मई, 2014 में एनडीए (National Democratic Alliance) सरकार के गठन के बाद से साढ़े चार सालों में पहली बार देखी गई है.

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है. यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है. जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है. अत: कहा जा सकता है, कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है.

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है. यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है. बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं.

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