अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

फरवरी 2018 में आठ ढांचागत उद्योगों की विकास दर 5.3% रही

फरवरी में रिफाइरी उत्पाद, खाद और सीमेंट का प्रदर्शन बेहतर रहने के चलते आठ ढांचागत क्षेत्र के उद्योगों ने 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। पिछले साल फरवरी में इन उद्योगों में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
आठ ढांचागत उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। जनवरी में ढांचागत क्षेत्र की 6.1 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।

फरवरी में पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन में 7.8 प्रतिशत वृद्धि हुई जबकि एक साल पूर्व समान महीने में इसमें 2.8 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।

खाद के उत्पादन में भी इस अवधि में 5.3 प्रतिशत तथा सीमेंट उत्पादन में 22.9 प्रतिशत सरकारी आंकड़ों के अनुसार वृद्धि हुई है।

बिजली उत्पादन भी पिछले साल फरवरी में 1.2 प्रतिशत के मुकाबले इस साल चार प्रतिशत बढ़ा है।

ढांचागत उद्योग को अर्थव्यवस्था के मुख्य उद्योग के रूप में परिभाषित किया जा सकता है ज्यादातर देशों में, यह एक ऐसा उद्योग है जो अन्य सभी उद्योगों का आधार है और यह मुख्य उद्योग बनने के लिए शीर्ष पर है। भारत में कोयला , कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्र औद्योगिक उत्पादन की कुल सूचकांक (आईआईपी) का 40.27% हैं।

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1 अप्रैल को भारतीय रिज़र्व बैंक का 83 वां स्थापना दिवस मनाया गया

भारतीय रिज़र्व बैंक का 1 अप्रैल को 83 वां स्थापना दिवस मनाया गया.भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हुई थी.शुरू में रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय कोलकाता में स्थापित किया गया था लेकिन 1937 में स्थायी रूप से इसे मुंबई में हस्तांतरित कर दिया गया था. केंद्रीय कार्यालय वह स्थान है, जहां गवर्नर बैठता है तथा जहां नीतियां तैयार की जाती हैं. 1949 मे राष्ट्रीयकरण के बाद से, रिज़र्व बैंक पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है.

भारतीय रिजर्व बैंक तथा बाबासाहेब डॉ॰ भीमराव आंबेडकर

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में बाबासाहेब डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने अहम भूमिका निभाई हैं, उनके द्वारा प्रदान किये गए दिशा-निर्देशों या निर्देशक सिद्धांत के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक बनाई गई थी. बैंक कि काम करने शैली और उसका दृष्टिकोण बाबासाहेब ने हिल्टन यंग कमीशन के सामने रखा था, जब 1926 में ये कमीशन भारत में रॉयल कमीशन ऑन इंडियन करेंसी एंड फिनांस के नाम से आया था तब इसके सभी सदस्यों ने बाबासाहेब के लिखे हुए ग्रंथ दी प्राब्लम ऑफ दी रुपी – इट्स ओरीजन एंड इट्स सोल्यूशन (रुपया की समस्या – इसके मूल और इसके समाधान) की जोरदार वकालत तथा उसकी पृष्टि की थी . इसे कानून का स्वरूप देते हुए ब्रिटिशों की वैधानिक सभा (लेसिजलेटिव असेम्बली) ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 का नाम दिया गया.

भारतीय रिज़र्व बैंक के प्राथमिक कार्य

-विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 को प्रबंधित करना.
-मौद्रिक नीति तैयार करना, कार्यान्वयन और निगरानी करना.
-बैंकिंग संचालन के मापदंडों को निर्धारित करना.
-जारी / विनिमय / आवश्यक मुद्रा और सिक्के को नष्ट करना.
-केन्द्रीय और राज्य सरकार के लिए मर्चेंट बैंकिंग फ़ंक्शन.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने 83 वर्षों के प्रयासों में आधुनिक बैंकिंग प्रथाओं के साथ ठोस क्रेडिट संरचना बनाने में एक प्रशंसनीय सेवा की है. ब्याज दरों की स्थिर संरचना, रुपए के विनिमय मूल्य में स्थिरता,सस्ती प्रेषण सुविधाएं, सार्वजनिक ऋण का सफल प्रबंधन, ध्वनि बिल बाजार का विकास और ऋण के तर्कसंगत आवंटन, विभिन्न वर्षों में बैंकरों के बैंक रिजर्व बैंक की कुछ उपलब्धियां हैं, जिसने न केवल इसमें योगदान दिया है बल्कि आर्थिक विकास पर भी बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक विश्वास को बढ़ाया है.

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