अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

पश्चिम एशिया तथा सीरिया में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

तेल की कीमतों में हाल ही में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई हैं। कीमतें नियंत्रित करने हेतु भारत सरकार ने ओपेक के सदस्यों के साथ बातचीत की है।

तेल कीमतों में दुनिया भर की प्रवृत्ति

पश्चिम एशिया में तनाव और सीरिया पर हाल ही में अमेरिका के हमले ने बाजार की अनिश्चितता में भी बढ़ोतरी की है जो कीमतों को आगे बढ़ा रही है। लेकिन तेल बाजार में लंबी अवधि के रुझान से भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में अल्पकालिक अस्थिरता को अलग करना महत्वपूर्ण है। हाल की अनिश्चितताओं के बिना, ब्रेंट क्रूड की कीमत सिर्फ एक माह पहले 62 डॉलर प्रति बैरल (2014 से सबसे ज्यादा) तक पहुंच गई है। कॉरपोरेटेड एक्शन के माध्यम से – “पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज का संगठन” (ओपेक) ने बाजार अधिशेष को समाप्त करने में सफलता हासिल की है।

भारत की नीति

     खरीदार कार्टेल – भारत ने चीन जैसे अन्य एशियाई तेल खरीदार देशों के साथ मिलकर ओपेक के सदस्यों के साथ बेहतर कीमतों पर सौदा करने का विचार किया था। लेकिन सरकार द्वारा की गयी इस पहल का समर्थन नहीं किया गया।
     लिबरल मार्केट – वैश्विक तेल की कीमतों में 2014 में गिरावट आई थी , लेकिन भारत सरकार ने कीमतों में तेजी रखने के लिए कर की दरें बढ़ा रखीं है।

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विश्व बैंक रिपोर्ट : 2018 में भारत की वृद्धि दर 7.3% रहेगी

विश्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। साथ ही विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की वृद्धि दर 2019-20 और 2020-21 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो जाएगी।

मुख्य तथ्य

भारत की आर्थिक प्रगति में सुधार दक्षिण एशिया को सबसे तेजी से बढ़ते हुए आर्थिक क्षेत्र में ले जाएगा ।भारत नोटबंदी और जीएसटी व्यवस्था के नकारात्मक प्रभाव से बाहर आ चुका है। भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की बदौलत इस क्षेत्र ने दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र का दर्जा फिर से हासिल कर लिया है।
निजी खपत विकास का प्राथमिक चालक रहेगा जबकि सेवा क्षेत्र तथा तेजी से औद्योगिक क्षेत्र उत्पादन वृद्धि का नेतृत्व करेंगे। निजी निवेश तथा निजी खपत में सुधार से इसके निरंतर आगे जाने की उम्मीद है।
हर महीने 1.3 मिलियन नए कामकाजी आयु के लोग जुड़ रहे हैं और भारत को रोजगार की दर बनाए रखने के लिए सालाना 8.1 मिलियन नौकरियों का सृजन करना होगा। 2005 से 2015 में रोजगार आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर रोजगार बाजार छोड़ने वाली महिलाओं के कारण रोजगार की दर में गिरावट आई है।

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