अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक देश बना

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश बन गया है। इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन (आईसीए) द्वारा साझा जानकारी के अनुसार भारत ने हैंडसेट उत्पादन के मामले में वियतनाम को पीछे छोड़ दिया है। भारत सरकार, एफटीटीएफ और आईसीए के कठोर और समन्वित प्रयासों से भारत संख्या के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश बन गया है।’

बाजार अनुसंधान फर्म आईएचएस, चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो और वियतनाम के सामान्य सांख्यिकी कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों का आईसीए ने हवाला दिया है। आईसीएस द्वारा साझा आंकड़ों के मुताबिक देश में मोबाइल फोन का वार्षिक उत्पादन 2014 में 30 लाख इकाई से बढ़कर 2017 में 1.1 करोड़ इकाई हो गया है।

2017 में वियतमान को पछाड़कर भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक देश बन गया है। मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ने के साथ देश में इनका आयात भी 2017-18 में घटकर आधे से कम रह गया है। फास्ट ट्रैक टास्क फोर्स (एफटीटीएफ) ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत 2019 तक मोबाइल फोन उत्पादन 50 करोड़ इकाई तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 46 अरब डॉलर होगा।

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1 अप्रैल 2018 से केंद्र सरकार द्वारा शेयरों की बिक्री पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर होगा लागू

केंद्र सरकार ने जानकारी दी है की इक्विटी होल्डिंग्स पर प्रस्तावित दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स )उस मुनाफे पर लागू होगा जिसे 1 अप्रैल 2018 के बाद शेयरों की बिक्री के जरिए हासिल किया जाएगा।

पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) टैक्स 1 अप्रैल से या उसके बाद शेयरों की बिक्री पर लागू होगा, लेकिन पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) की गणना शेयर को खरीदते समय जो उसकी कीमत थी उसमें और 31 जनवरी को बाजार में अधिकतम मूल्य में से जो भी ज्यादा होगा, उसके आधार पर की जाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट में शेयरों की बिक्री के मुनाफे पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगाने की घोषणा की थी, जो कि शेयरों की बिक्री से प्राप्त किए गए मुनाफे पर लागू होगी। वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में एक अप्रैल से एक लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 10 फीसद का टैक्स लगाया गया है, हालांकि 31 जनवरी 2018 तक के सभी मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर

कोई भी लाभ जो कि किसी कैपिटल एसेट्स (पूंजीगत परिसंपत्ति) की बिक्री के जरिए प्राप्त किया जाता है उसे पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) कहा जाता है। इस लाभ या मुनाफे पर उस वर्ष कर देनदारी बनती है जब संपत्ति का लेनदेन हुआ हो। हालांकि पैत्रक परिसंपत्तियों पर पूंजीगत लाभ कर लागू नहीं होता है। क्योंकि ऐसे मामलों में बिक्री नहीं शामिल होती है बल्कि संपत्तियों का स्थानांतरण होता है। हालांकि अगर कोई व्यक्ति ऐसी किसी संपत्ति की बिक्री करता है जो कि उसे पैत्रक रूप से मिली है। तो उस पर उसे कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।

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