पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

22 अप्रैल : विश्व पृथ्वी दिवस

प्रतिवर्ष 22 अप्रैल विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय को दर्शाने के लिये तथा पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये प्रत्येक वर्ष विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व पृथ्वी दिवस 2019 का विषय “हमारी प्रजातियों को बचाओ” (Protect Our Species) है।

विश्व पृथ्वी दिवस

पहली बार 22 अप्रैल, 1970 को पृथ्वी दिवस मनाया गया था। विश्व पृथ्वी दिवस की स्थापना 1970 में अमेरिकी सीनेटर (सांसद) गेलॉर्ड नेल्सन के द्वारा एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी थी। इसे 1990 से अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाने लगा तथा वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र ने भी 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की थी। विश्व पृथ्वी दिवस के कार्यक्रम की स्थापना के पीछे कैलिफोर्निया में तेल रिसाव की भारी बर्बादी की घटना थी। इसने हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण के लिए जन चेतना बढ़ाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के उपायों को लागू करने की दिशा में गेलॉर्ड नेल्सन को नेतृत्व करने की प्रेरणा दी।

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राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन के सम्बन्ध में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन के सम्बन्ध में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सबमिट की जानी है। चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली खंड पीठ ने राज्यों को एफिडेविट फाइल करके समितियों की स्थापना न करने का कारण पूछा है। ट्रिब्यूनल द्वारा गठित मॉनिटरिंग समिति की सूचना के अनुसार 2,52,709 ग्राम पंचायतों में जैव-विविधता प्रबंधन समितियों की स्थापना की जानी थी, परन्तु अब तक केवल 1,44,371 जैव-विविधता प्रबंधन समितियों की स्थापना हो पायी है। अभी भी एक लाख से अधिक जैव-विविधता समितियों की स्थापना की जानी शेष है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 में एनजीटी की स्थापना की गयी थी। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो भारत के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण का अधिकार प्रदान करता है। एनजीटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य की न्यूनतम संख्या 10 है तथा प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम संख्या 20 होती है।

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