पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

16 सितम्बर : अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस

अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस (विश्व ओजोन दिवस) को प्रत्येक वर्ष 16 सितम्बर को मनाया जाता है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस की थीम “कीप कूल एंड कैरी ऑन : द मोंट्रियल प्रोटोकॉल” है। इस दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 19 दिसम्बर, 1994 में की गयी थी। इसी दिन 1987 में मोंट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गये थे। इसका उद्देश्य ओजोन परत के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना तथा इसकी संरक्षण के लिए समाधान ढूंढना है।

ओजोन परत

ओजोन परत गैस की एक सुरक्षा परत है, यह पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। इस परत में ओजोन (O3) की काफी अधिक मात्रा पायी जाती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हेलॉन तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड जैसे तत्त्व ओजोन परत के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं।

मोंट्रियल प्रोटोकॉल

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, इसे ओजोन परत के संरक्षण के लिए बनाया गया था। इस संधि पर 26 अगस्त, 1987 को कनाडा के मोंट्रियल में सहमती प्रकट की गयी थी, यह संधि 26 अगस्त, 1989 से लागू हुई थी। इस संधि के बाद मई, 1989 में हेलसिंकी में एक बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में क्लोरोफ्लोरोकार्बन, CTC हेलॉन, मिथाइल ब्रोमाइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड को कम करने पर चर्चा की गयी थे। इस प्रस्ताव के विश्व भर के 197 देशों द्वारा पारित किया गया था। यह संधि काफी सफल भी रही है।

ओजोन परत संरक्षण के लिए विएना सम्मेलन

यह एक बहुराष्ट्रीय समझौता है, इस पर 1985 में सहमती प्रकट की गयी थी और यह 1988 में लागू हुआ था। इस 197 सदस्य देशों द्वारा पारित किया गया है। यह ओजोन परत की संरक्षण के लिए एक फ्रेमवर्क के रूप में कार्य करता है। परन्तु इस समझौते में ओजोन परत को नष्ट करने वाले कारकों को कम करने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।

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राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने भूमिगत जल की अवैध निकासी पर रोक लगाने के लिए समिति का गठन किया

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने भूमिगत जल की अवैध निकासी पर रोक लगाने के लिए समिति का गठन किया है। इन सन्दर्भ में शैलेश सिंह नामक व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गयी थी। इस समिति में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (रुड़की) तथा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त सचिव शामिल होंगे।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 में एनजीटी की स्थापना की गयी थी। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो भारत के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण का अधिकार प्रदान करता है। एनजीटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य की न्यूनतम संख्या 10 है तथा प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम संख्या 20 होती है।

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