पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

न्यूयॉर्क में किया गया संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन 2019 का आयोजन

संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन 2019 का आयोजन न्यूयॉर्क में किया गया।  इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य पेरिस समझौते का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इस शिखर सम्मेलन में 9 स्वतंत्र ट्रैक्स पर फोकस किया गया है। ‘इंडस्ट्री ट्रांजीशन’ ट्रैक का नेतृत्व भरता और स्वीडन द्वारा किया जा रहा है जबकि विश्व आर्थिक फोरम द्वारा इसका समर्थन किया जा रहा है।

शिखर सम्मेलन के एक्शन पोर्टफोलियो

1. उर्जा रूपांतरण : जीवाश्म इंधन से नवीकरणीय उर्जा की ओर तीव्र स्थानांतरण।

2. उद्योग रूपांतरण : स्टील, रसायन, तेल व गैस तथा सीमेंट जैसे उद्योगों का रुपातंरण।

3. प्रकृति आधारित समाधान : उत्सर्जन में कमी करके महासागरों, वनों तथा कृषि की प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि करना।

4. शहर व स्थानीय कारवाई : कम उत्सर्जन वाले भवनों तथा परिवहन साधनों का निर्माण करना।

5. प्रतिरोध क्षमता

6. जलवायु वित्त तथा कार्बन मूल्य निर्धारण

7. न्यूनीकरण : राष्ट्रीय स्तर पर निश्चित योगदान को गति देना तथा पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दीर्घकालीन रणनीतियों का निर्माण करना।

8. जन सहभागिता : जलवायु परिवतन के विरुद्ध कारवाई करने के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा देना तथा युवाओं को इसमें शामिल करना।

9. सामाजिक तथा राजनीतिक प्रोत्साहन : वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रतिबद्धता तथा संकटग्रस्त समूहों की सुरक्षा करना।

उद्योग रूपांतरण

भारत और स्वीडन के प्रधानमंत्री 24 सितम्बर, 2019 को नया लीडरशिप ग्रुप लांच करेंगे, यह समूह 3 स्तंभों पर कार्य करेगा

  • सार्वजनिक-निजी सहयोग
  • उद्योग की प्रतिबद्धता
  • नवाचार तथा तकनीक आदान-प्रदान

2018 में इस सम्मेलन का आयोजन कैलिफ़ोर्निया में किया गया था। इसका उद्देश्य पेरिस समझौते के क्रियान्वयन के लिए विश्व भर के नेताओं को एकजुट करना है।

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16 सितम्बर : अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस

अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस (विश्व ओजोन दिवस) को प्रत्येक वर्ष 16 सितम्बर को मनाया जाता है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस की थीम “कीप कूल एंड कैरी ऑन : द मोंट्रियल प्रोटोकॉल” है। इस दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 19 दिसम्बर, 1994 में की गयी थी। इसी दिन 1987 में मोंट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गये थे। इसका उद्देश्य ओजोन परत के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना तथा इसकी संरक्षण के लिए समाधान ढूंढना है।

ओजोन परत

ओजोन परत गैस की एक सुरक्षा परत है, यह पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। इस परत में ओजोन (O3) की काफी अधिक मात्रा पायी जाती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हेलॉन तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड जैसे तत्त्व ओजोन परत के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं।

मोंट्रियल प्रोटोकॉल

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, इसे ओजोन परत के संरक्षण के लिए बनाया गया था। इस संधि पर 26 अगस्त, 1987 को कनाडा के मोंट्रियल में सहमती प्रकट की गयी थी, यह संधि 26 अगस्त, 1989 से लागू हुई थी। इस संधि के बाद मई, 1989 में हेलसिंकी में एक बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में क्लोरोफ्लोरोकार्बन, CTC हेलॉन, मिथाइल ब्रोमाइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड को कम करने पर चर्चा की गयी थे। इस प्रस्ताव के विश्व भर के 197 देशों द्वारा पारित किया गया था। यह संधि काफी सफल भी रही है।

ओजोन परत संरक्षण के लिए विएना सम्मेलन

यह एक बहुराष्ट्रीय समझौता है, इस पर 1985 में सहमती प्रकट की गयी थी और यह 1988 में लागू हुआ था। इस 197 सदस्य देशों द्वारा पारित किया गया है। यह ओजोन परत की संरक्षण के लिए एक फ्रेमवर्क के रूप में कार्य करता है। परन्तु इस समझौते में ओजोन परत को नष्ट करने वाले कारकों को कम करने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।

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