पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

एशियाई हाथी, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और बंगाल फ्लोरिकन को CMS COP13 में “लुप्तप्राय प्रवासी प्रजाति” के रूप में वर्गीकृत किया गया

20 फरवरी, 2020 को एशियाई हाथी, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण)  और बंगाल फ्लोरिकन को CMS COP 13 में “लुप्तप्राय प्रवासी प्रजाति” के रूप में घोषित किया गया था। इस प्रस्ताव को 130 देशों द्वारा स्वीकार किया गया।

एशियाई हाथी

भारत ने भारतीय हाथी (एशियाई हाथी)  को “राष्ट्रीय विरासत पशु” घोषित किया है। यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत पशु को अधिकतम कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। एशियाई हाथियों को भारत में भारतीय हाथी कहा जाता है। भारतीय हाथियों के खतरों में निवास नुकसान, मानव-हाथी संघर्ष, निवास स्थान विनाश, अवैध व्यापार और अवैध शिकार शामिल हैं।

बंगाल फ्लोरिकन

प्राकृतिक आवास के विनाश के कारण बंगाल फ्लोरिकन की आबादी में बहुत गिरावट आई है। बंगाल फ्लोरिकन संरक्षित क्षेत्रों के बाहर प्रजनन नहीं करता। इसे IUCN सूची के तहत गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति (critically endangered species)  के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

ग्रेट भारतीय बस्टर्ड

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ( गोडावण) को IUCN रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति (critically endangered species) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। भारत सरकार ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के लिए इसके आवास को संरक्षण रिजर्व घोषित किया है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अनुसार देश में केवल 150 गोडावण बचेेे हुए हैं।

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भारत में शुरू हुआ 13वां संयुक्त राष्ट्र प्रवासी पक्षी प्रजाति संरक्षण सम्मेलन

भारत में 17 फरवरी, 2020 से 22 फरवरी, 2020 के बीच 13वें संयुक्त राष्ट्र प्रवासी पक्षी प्रजाति संरक्षण सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन का संक्षिप्त नाम CMS-COP-13 (13th Conference of Parties (COP) of the Convention on Conservation of Migratory Species of Wild Animals) है।

मुख्य बिंदु

भारत को अगले तीन वर्ष के लिए इस कांफ्रेंस का अध्यक्ष चुना गया है। इस सम्मेलन में 130 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के लिए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोदावण) को शुभंकर बनाया गया है।

Theme: Migratory species Connect the Planet and we welcome them home

प्रवासी वन्य जीवों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए सम्मेलन (CMS)

CMS संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है। इसे बोन कन्वेंशन के नाम से भी जाना जाता है। CMS का उद्देश्य थलीय, समुद्री तथा उड़ने वाले अप्रवासी जीव जंतुओं का संरक्षण करना है। इस कन्वेंशन के द्वारा अप्रवासी वन्यजीवों तथा उनके प्राकृतिक आवास पर विचार विमर्श के लिए एक वैश्विक प्लेटफार्म तैयार होता है।

इस संधि पर 1979 में जर्मनी के बोन में हस्ताक्षर किये गये थे। यह संधि 1983 में लागू हुई थी। इसमें अफ्रीका, मध्य तथा दक्षिण अमेरिका, एशिया, यूरोप तथा ओशनिया के 120 हितधारक (स्टेकहोल्डर) शामिल हैं।

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