पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने भूमिगत जल की अवैध निकासी पर रोक लगाने के लिए समिति का गठन किया

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने भूमिगत जल की अवैध निकासी पर रोक लगाने के लिए समिति का गठन किया है। इन सन्दर्भ में शैलेश सिंह नामक व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गयी थी। इस समिति में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (रुड़की) तथा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त सचिव शामिल होंगे।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 में एनजीटी की स्थापना की गयी थी। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो भारत के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण का अधिकार प्रदान करता है। एनजीटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य की न्यूनतम संख्या 10 है तथा प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम संख्या 20 होती है।

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कोइम्बतूर में राष्ट्रीय पक्षी विषविज्ञान केंद्र की स्थापना की गयी

केन्द्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तमिलनाडु के कोइम्बतूर में सलीम अली पक्षी विज्ञान व प्राकृतिक विज्ञान केंद्र (SACON) में राष्ट्रीय पक्षी विषविज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु

इस केंद्र का उद्देश्य पक्षियों की प्रजाति पर रासायनिक प्रदूषकों के प्रभाव का अध्ययन करना है और इसके जनसँख्या तथा समुदायों से जोड़ना है। इस केंद्र के द्वारा कीटनाशकों, भारी धातुओं, पालीसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन, पालीक्लोरीनेटेड बाईफिनाइल इत्यादी के पक्षियों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगा। इस केंद्र लिए केन्द्रीय मंत्रालय ने चार करोड़ रुपये आबंटित किये हैं। इस केंद्र में हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमाटोग्राफ (HPLC), एटॉमिक अब्ज़ोर्प्शन स्पेक्ट्रोमीटर (AAC) तथा इन्डक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमीटर (ICP-MS) जैसे उपकरण मौजूद हैं।

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