पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

नई दिल्ली में किया जायेगा UNCCD COP14 का आयोजन

भारत में पहली बार संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (UNCCD) के कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज के 14वें सत्र (COP 14) का आयोजन 2 से 14 सितम्बर, 2019 के दौरान किया जायेगा। इस इवेंट में 197 देशों से 5000 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

मुख्य बिंदु

इससे पहले केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फ्लैगशिप प्रोजेक्ट लांच किया (बोन चैलेंज का हिस्सा), इसके द्वारा भारत की वन परिदृश्य पुनर्स्थापन क्षमता में वृद्धि की जायेगी। इस प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड और कर्नाटक में साढ़े तीन वर्ष तक पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जायेगा।

बोन चैलेंज एक वैश्विक प्रयास है, इसका उद्देश्य 2020 तक 150 मिलियन हेक्टेयर नष्ट वन तथा निम्नीकृत भूमि को पुनः बहाल करना है, 2030 के लिए इसका लक्ष्य 350 हेक्टेयर रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख कन्वेंशन हैं : UNFCCC, UNCCD तथा CBD (Convention on Biological Diversity)। संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (UNCCD) की स्थापना 1994 में की गयी थी।

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2018 में कार्बन उत्सर्जन में 2% की वृद्धि हुई: अध्ययन

यूनाइटेड किंगडम बेस्ड तेल व गैस कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने हाल ही में “The BP Statistical Review of World Energy” नामक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में कार्बन उत्सर्जन में 2% की वृद्धि हुई। यह 2010-11 के बाद होने वाली सबसे ज्यादा वृद्धि है।

मुख्य बिंदु

इस रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए काफी कम प्रयास किये गये हैं। उर्जा मांग तथा कार्बन उत्सर्जन में अत्याधिक वृद्धि हो रही है।

वैश्विक उर्जा मांग में 2.9% की वृद्धि हुई, इस मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका में शेल रिज़र्व का अधिक दोहन किया गया। 2018 में नवीकरणीय  उर्जा के उपयोग में 14.5% वृद्धि हुई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार हरित/ नवीकरणीय उर्जा के द्वारा शुद्ध-शून्य ग्रीन हाउस उत्सर्जन को प्राप्त करना काफी मुश्किल है। इसलिए सरकारों को कोयला व तेल से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में कार्य करना होगा।

The BP Statistical Review of World Energy

इसे उर्जा उद्योग का मानक माना जाता है। इसमें देशों के तेल भंडार के आकार, नवीकरणीय उर्जा के उत्पादन तथा विभिन्न उपभोग दरों का वर्णन किया जाता है।

विश्व में सभी देशों में सरकारें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए डेडलाइन्स सेट कर रही हैं। ब्रिटेन की टॉप एडवाइजरी बॉडी ने ब्रिटिश सरकार के लिए 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य रखने की अनुशंसा की है। इसे कई यूरोपीय सरकारों द्वारा अपनाया गया है।

अमेरिका में 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य बनाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। परन्तु यह लक्ष्य काफी मुश्किल है।

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