पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

वैश्विक पर्यावरण परिदृश्य 2019 : मुख्य बिंदु

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने हाल ही में वैश्विक पर्यावरण परिदृश्य 2019 नामक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के सन्दर्भ में निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत किये गये हैं :

  • यदि वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ने से रोका जाए तो स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत को 3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 210 खरब रुपये) की बचत होगी।
  • INDC में भारत की प्रतिबद्धता के अनुसार भारत 2030 तक उत्सर्जन के स्तर को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने से रोकने के लिए भारत को कोयले से चलने वाले उर्जा सयंत्रों के निर्माण को रोकना होगा।
  • 2015 के पेरिस समझौते के अनुसार इस सदी में वैश्विक तापमान को पूर्व औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़ने देने का लक्ष्य रखा गया है। परन्तु ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के मामले में अधिकतर देशों का प्रदर्शन ज्यादा बेहतर नहीं रहा है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रोग्राम (UNEP)

UNEP संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा है, यह संगठन पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी कार्य करता है। जून, 1972 में मानवीय वातावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के परिणामस्वरूप UNEP की स्थापना की गयी थी। इसका मुख्यालय केन्या के नैरोबी में स्थित है। इसके 6 अन्य क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं। UNEP पर्यावरण शिक्षा, प्रचार तथा धारित विकास के लिए पर्यावरण के सदुपयोग पर बल इत्यादि कार्य करता है।

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वायु प्रदूषण से बढ़ता है मधुमेह का खतरा : अध्ययन

हाल ही में चीन में किये गये अध्ययन में यह पाया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण मधुमेह का खतरा बढ़ता है। इस अध्ययन के लिए चीन के 15 प्रान्तों में 88,000 लोगों का डाटा एकत्रित किया गया। इस अध्ययन में 2004 से 2015 की अवधि में PM 2.5 के प्रभाव का अध्ययन किया गया।

यह अध्ययन बीजिंग के फुवाई अस्पताल तथा अमेरिका के एमोरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। इस अध्ययन का प्रकाशन “एनवायरनमेंट इंटरनेशनल” नामक पत्रिका में किया गया है।

अध्ययन

  • लम्बे समय तक नुकसानदायक स्मोग कणों के प्रभाव से रहने के कारण मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इस अध्ययन में चीन में वायु प्रदूषण तथा मधुमेह रोग में सम्बन्ध का पता चला है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष 1 मिलियन लोगों की मृत्यु समय से पूर्व हो जाती है।
  • PM 2.5 कणों के प्रभाव में 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की वृद्धि हो जाने के कारण मधुमेह रोग का खतरा 16% बढ़ जाता है।
  • उत्तरी अमेरिका, यूरोप, हांगकांग तथा ताइवान में किया गये अध्ययन में भी वायु प्रदूषण तथा मधुमेह रोग के बीच सम्बन्ध की पुष्टि हुई है।

2017 में संयुक्त राष्ट्र ने एक अध्ययन रिपोर्ट का प्रकाशन किया था, इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन में मधुमेह की समस्या विश्व में सर्वाधिक है, चीन की लगभग 11% आबादी इससे पीड़ित है।

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