पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

यूरोपीय संघ ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया

28 मार्च, 2019 को यूरोपीय संसद में हुए मतदान में 560-35 वोट से यूरोप में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया गया। यह प्रतिबन्ध 2021 से लागू होगा। इस प्रतिबन्ध के बाद यूरोपीय संघ सदस्य देशों में प्लास्टिक कप व प्लेट, स्ट्रॉ इत्यादि पर रोक लग जायेगी।

इसका उद्देश्य महासागरों में फैलने वाले प्रदूषण पर रोक लगाना है। इसके अतिरिक्त 2029 तक 90% प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग का लक्ष्य भी रखा गया है। 2025 तक निर्मित की जाने वाले 25% बोतलें रीसायकल किये गये प्लास्टिक से बनायीं जायेंगी, 2030 तक यह आंकड़ा 30% पहुँच जाएगा।

यूरोपीय संसद

यूरोपीय संसद के सदस्यों का चुनाव सदस्य राष्ट्रों में प्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं द्वारा किया जाता है। वे यूरोपीय संसद में लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे यूरोपीय संघ के कानून निर्माण में हिस्सा लेते तथा यूरोपीय संघ के लोकतान्त्रिक कार्य को सुनिश्चित करते हैं।

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वैश्विक उर्जा तथा कार्बन डाइऑक्साइड स्टेटस रिपोर्ट : मुख्य बिंदु

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी ने वैश्विक उर्जा तथा कार्बन डाइऑक्साइड स्टेटस रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :

  • उर्जा मांग में चीन, अमेरिका और भारत का हिस्सा लगभग 70% है, पिछले वर्ष उर्जा मांग में 2.3% की वृद्धि हुई थी।
  • उर्जा मागं में वृद्धि के प्रमुख कारण मज़बूत वैश्विक अर्थव्यवस्था, अधिक गर्मी तथा कुछ क्षेत्रों में कूलिंग की मांग है।
  • उर्जा मांग में वृद्धि से प्राकृतिक गैस की मांग में भी वृद्धि हुई है, बढ़ते हुए उर्जा उपभोग में प्राकृतिक गैस का हिस्सा 45% है। अमेरिका और चीन में प्राकृतिक गैस में की मांग में काफी अधिक वृद्धि हुई है।
  • सभी इंधनों की मांग में भी वृद्धि हुई है, इस मांग का 70% हिस्सा जीवाश्म इंधन से पूरा किया गया।
  • सौर तथा पवन उर्जा उत्पादन में दो अंकीय वृद्धि हुई है।  सौर उर्जा उत्पादन में 31% की वृद्धि दर्ज की गयी। परन्तु यह उच्च विद्युत् मांग की पूर्ती के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसलिए कोयले के उपयोग में वृद्धि हुई है।
  • 2018 में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 1.7% की वृद्धि हुई है, अब यह बढ़कर 33 गीगाटन हो गया है।
  • उर्जा उत्पादन में कोयले का उपयोग 10 गीगाटन से अधिक बढ़ गया है।
  • कोयले से उर्जा का अधिक उत्पादन एशिया में किया जाता है।
  • 2018 में वैश्विक विद्युत् की मांग में 4% की वृद्धि हुई, यह बढ़कर 23,000 टेरावाट ऑवर्स पर पहुँच गयी है।
  • पवन तथा सौर उर्जा सहित नाविकरणीय उर्जा में चीन अग्रणी है, इसके बाद यूरोप तथा अमेरिका हैं।

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