पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

पेरियार नदी में बढ़ता हुआ प्रदूषण

पेरियार नदी में पुनः प्रदूषण बढ़ रहा है। पेरियार नदी से कोच्ची शहर तथा इसके आसपास के क्षेत्र को पेयजल की आपूर्ति होती है। यह लोगों तथा सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है। कुछ एक भाग में पानी बिल्कुल काला हो गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पेरियार नदी के जल के काला होने का कारण पानी की ख़राब गुणवत्ता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वक्तव्य में कहा है कि निकटवर्ती नगरों से सीवेज नदी प्रणाली में पहुँच रहा है। जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है और जल का रंग भी बदल रहा है।

पेरियार नदी

पेरियार नदी केरल में बहती है। इसका उद्गम पश्चिमी घाट में होता है। कुछ उत्तर की ओर बहने के बाद पेरियार झील की ओर बहती है। पेरियार झील के कृत्रिम झील है, इसका निर्माण नदी पर मुल्लापेरियार बाँध के कारण हुआ है। पेरियार झील से सुरंग के द्वारा जल तमिलनाडु की वैगई नदी को ले जाया जाता है जहाँ पर इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। इस नदी पर इदुक्की बाँध का निर्माण भी किया है। पहाड़ों से बहने के बाद यह नदी तटीय मैदानों से होते हुए अरब सागर में प्रवेश करती है।

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ग्लोबल कूलिंग कोएलिशन

डेनमार्क के कोपेनहेगेन में Global Conference on Synergies between the 2030 Agenda and Paris Agreement के दौरान ग्लोबल कूलिंग कोएलिशन को लांच किया गया।

मुख्य बिंदु

ग्लोबल कूलिंग कोएलिशन को संयुक्त राष्ट्र, क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन, किगाली कूलिंग एफिशिएंसी प्रोग्राम तथा सस्टेनेबल एनर्जी फॉर आल (SEforALL) का समर्थन प्राप्त है। इस गठबंधन में चिली तथा रवांडा के पर्यावरण मंत्री शामिल है। इसमें ENGIE और Danfoss नामक इंजीनियरिंग फर्म के प्रमुख भी शामिल है। इसके अतिरिक्त इसमें सिविल सोसाइटी, अनुसन्धान व अंतर-सरकारी संगठनों के नेता भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य समाधानों की खोज करना तथा स्वच्छ व कुशल कूलिंग के लिए कार्य करना है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

जिस प्रकार हीट वेव नियमित रूप से बढ़ रही है, इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए इस प्रकार की कूलिंग (शीतकरण) की आवश्यकता है जिससे लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहे तथा खाद्यान्न पौष्टिक रहे तथा अर्थव्यवस्था उत्पादक बने।

अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी के अनुसार बढ़ते तापमान तथा लोगों की व्यय क्षमता में वृद्धि होने के कारण वर्तमान में 1.2 अरब एयर कंडीशनर की संख्या 2050 तक 4.5 अरब तक पहुँच जायेगी। परन्तु उत्सर्जन स्तरों को सीमा के अन्दर रखना एक बड़ी चुनौती है।

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