पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

गंगा नदी के किनारे बसे शहरों में स्वच्छता के लिए सर्वेक्षण

भारतीय गुणवत्ता परिषद् ने गंगा नदी के किनारे बसे शहरों में स्वच्छता की स्थिति के आकलन के लिए सर्वेक्षण किया। पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के किनारे 39 शहर, उत्तर प्रदेश में 20 शहर, बिहार में 17, उत्तराखंड में 14 तथा झारखण्ड में 2 शहर स्थित है।

सर्वेक्षण के परिणाम

  • गंगा नदी के किनारे पर बसे 5 में से 4 शहर नदी के निकट ही कचरे को डंप करते हैं। जबकि 55% शहर गंदे पानी का उपचार किये बिना ही यूज़ गंगा नदी में बहा देते हैं।
  • केवल 19 शहरों में ही म्युनिसिपल ठोस कचरा प्लांट हैं, केवल 7 शहरों में ही ट्रैश क्लीनर स्थापित हैं।
  • 72% शहरों से नाले सीधा गंगा नदी में गन्दा पानी छोड़ देते हैं, वे किसी प्रकार के फ़िल्टर इत्यादि का उपयोग नहीं कर रहे।
  • प्रदर्शन के आधार पर 12 शहरों को A ग्रेड, 44 को B ग्रेड तथा अन्य शहरों को C ग्रेड प्राप्त हुआ।

भारतीय गुणवत्ता परिषद्

यह एक प्रमाणन संस्था है, इसकी स्थापना भारत सरकार ने उद्योगों के साथ मिलकर की थी। यह एक गैर-लाभकारी स्वायत्त संस्था है। इसका उद्देश्य देश में गुणवत्ता आन्दोलन को फैलाना है।

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केंद्र सरकार ने लांच किया राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम  

केन्द्रीय गृह मंत्री हर्ष वर्धन ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को लांच किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरों में बढ़ते हुए वायु प्रदूषण का मुकाबला करना है।

मुख्य बिंदु

इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • यह एक पंचवर्षीय कार्यक्रम है, इसके द्वारा PM10 तथा PM 2.5 में 2024 तक 20-30% की कमी लायी जायेगी। इसके लिए 2017 को आधार वर्ष माना जायेगा।
  • इस कार्यक्रम में 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों  को शामिल किया गया है। इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 से 2015 के बीच की वायु गुणवत्ता के आधार पर किया है।

नॉन-अटेनमेंट शहर

वे शहर नॉन-अटेनमेंट शहर हैं जिनमे राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक वायु गुणवत्ता निरंतर ख़राब रहती है। नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कलकत्ता, नॉएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई ऐसे बड़े शहर शामिल हैं।

  • इस कार्यक्रम के तहत केंद्र ने देश भर में वायु की गुणवत्ता के माप के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क को फैलाने का निश्चय किया है।
  • 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों में प्रदूषण के कारकों तथा उनके योगदान का अध्ययन किया जायेगा।
  • पर्यावरण मंत्रालय की सर्वोच्च समिति उचित सूचकों के आधार पर समय-समय पर प्रदूषण के कारकों की प्रगति की समीक्षा करती रहेगी।
  • प्रदूषण कारकों के आधार पर प्रत्येक शहर को क्रियान्वयन के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा जायेगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत रियल-टाइम डाटा कलेक्शन तथा तीन स्तरीय प्रणाली का उपयोग किया जायेगा तथा स्वच्छ वायु तकनीक के शोध को बढ़ावा दिया जायेगा।
  • राज्यों को ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में कार्य करना होगा और चार्जिंग अधोसंरचना पर बल देना होगा तथा BS-VI नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। राज्यों को अपने स्तर पर सार्वजनिक परिवहन को अधिक बढ़ावा देना होगा।

हालांकि यह कार्यक्रम राज्यों के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। पर्यावरणविदों ने इस कार्यक्रम को कानूनी रूप से बाध्य बनाने की मांग की है। प्रदूषण से करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए कड़े कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

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