पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

लॉक डाउन से गंगा नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ

22 मार्च, 2020 को देश में लगाए गए लॉक डाउन ने हवा की गुणवत्ता और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया है। CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के अनुसार जल निकायों में 40 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल प्रवेश करता है।

मुख्य बिंदु

एक नदी के जल प्रदूषण को बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) के आधार पर मापा जाता है। गंगा औद्योगिक अपशिष्ट और अनुपचारित सीवेज के लिए डंप यार्ड बन गई है। 1985 के बाद से, गंगा एक्शन प्लान I के साथ गंगा को साफ करने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। 2015 में गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सबसे बड़ी पहल नमामि गंगे शुरू की गई।

COVID-19 के बाद

सीपीसीबी के रियल-टाइम मॉनिटरिंग डाटा के मुताबिक, गंगा के 36 निगरानी बिंदुओं में से 27 अब स्वच्छ हैं, वहां पर नदी के जल वन्यजीवों और मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त हैं।

कारण

पानी की गुणवत्ता में सुधार का प्रमुख कारण यह है कि घाटों के पास स्नान, पर्यटन, मेले जैसी गतिविधियाँ रोक दी गईं। साथ ही, नदी के आसपास की प्रमुख औद्योगिक गतिविधियों को रोक दिया गया।

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भारत ने पीटर्सबर्ग जलवायु वार्ता में हिस्सा लिया

28 अप्रैल, 2020 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए “पीटरबर्ग क्लाइमेट डायलॉग” के 11वें सत्र में भाग लिया।

मुख्य बिंदु

इस संवाद की मेजबानी जर्मनी ने की थी। इसकी सह-अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम ने की थी। इस संवाद में 30 से अधिक देशों ने भाग लिया। इस दौरान COVID ​​-19 से निपटने, जीवन बचाने और बीमारी के सामाजिक और आर्थिक परिणामों को दूर करने के उपायों के बारे में चर्चा की गई। इसमें पेरिस समझौते के कार्यान्वयन चरण में आगे बढ़ने की तैयारी के बारे में भी चर्चा की गयी।

भारत

भारत ने एक जलवायु प्रौद्योगिकी का सुझाव दिया जो सस्ती कीमत पर सभी के लिए खुला हो। भारत ने विकासशील देशों को तुरंत 1 ट्रिलियन डॉलर  अनुदान देने का भी सुझाव दिया।

पीटर्सबर्ग जलवायु वार्ता

2009 में कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन की विफलता के बाद से जर्मनी द्वारा वार्ता का आयोजन किया जा रहा है। इस वार्ता में आमतौर पर पर्यावरण मंत्री हिस्सा लेते हैं।

कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन

कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन एक जलवायु समझौते देने में विफल रहा। 2009 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC) को आमतौर पर कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन के रूप में जाना जाता है। यह कोपेनहेगन, डेनमार्क में आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन में कोपेनहेगन समझौते का मसौदा तैयार किया गया था। इस समझौते के तहत विकसित देश 30 बिलियन डालर तक की प्रतिबद्धता के लिए सहमत हुए।

अन्य प्रमुख संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन

2010 में ग्रीन क्लाइमेट फंड की स्थापना की गई थी। 2012 में क्योटो प्रोटोकॉल को अपनाया गया था। 2015 में पेरिस समझौते को अपनाया गया था।

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