पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

जल प्रौद्योगिकी व पर्यावरण नियंत्रण सम्मेलन

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह ने इजराइल में जल प्रौद्योगिकी व पर्यावरण नियंत्रण सम्मेलन (WATEC) में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में जल तथा पर्यावरण प्रबंधन से सम्बंधित प्रौद्योगिकी पर चर्चा की गयी। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों ने जल से सम्बंधित प्रौद्योगिकी को प्रस्तुत किया।

महत्व

जल प्रबंधन के मामले में इजराइल को आदर्श देश माना जाता है। इजराइल 80% जल का उपचार करके इसका पुनः उपयोग कृषि के लिए किया जाता है। इजराइल ड्रिप इरीगेशन तथा समुद्री जल को डीसेलाइन करने में महारत रखता है।

“Dynamic Ground Water Resources”  रिपोर्ट के मुताबिक कृषि सेक्टर में 89% जल का उपयोग किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक 10% जल की बचत करने से जल की उपलब्धता अगले 50 वर्षों के लिए बढ़ जायेगी। भारत में तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा में जल की समस्या काफी विकट है।

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राष्ट्रीय जैव इंधन नीति की क्रियान्वयन अपडेट्स

केन्द्रीय पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जून, 2018 में राष्ट्रीय जैव इंधन नीति के सन्दर्भ में अधिसूचना जारी की थी। 18 नवम्बर, 2018 को केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस नीति के क्रियान्वयन के सन्दर्भ में लोकसभा में लिखित जवाब दिया है।

सरकार द्वारा उठाये गये कदम तथा उपलब्धियां

  • 2013-14 में पेट्रोल में 1.53% एथेनॉल मिलाया जाता था, 2017-18 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की दर 4.22% कर दी गयी है।
  • 2018-19 के लिए भारत सरकार ने निर्धारित 225 करोड़ रुपये लीटर के मुकाबले अभी तक 180 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद की है।
  • देश की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 335 करोड़ लीटर है।

जैव इंधन पर मौजूदा सरकारी योजनायें

  • Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation स्कीम के तहत देश भर में 2023 तक 5000 संपीडित बायो गैस प्लांट्स की स्थापना की जाएगी।
  • एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम में शामिल तेल मार्केटिंग कंपनियां अधिकतम 10% मिश्रित एथेनॉल के साथ पेट्रोल बेच सकती हैं।

राष्ट्रीय जैव इंधन नीति, 2018

इस नीति में जैव इंधन को प्रथम पीढ़ी (1G), द्वितीय पीढ़ी (2G) और तृतीय पीढ़ी (3G) में विभाजित किया गया है। इसमें प्रत्येक श्रेणी को उचित वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त स्टॉक से लाभदायक तरीके से निजात दिलाना और देश के तेल के आयात को कम करना है। इसके लिए सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की नयी श्रेणी को अनुमति दी, इसमें प्रमुख फसलें हैं : गन्ना रस, मक्की, कसावा तथा अन्य स्टार्च युक्त अन्न जिसका उपयोग मानव उपभोग के लिए नहीं किया जा सकता।

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