पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग मध्य प्रदेश को मिला

कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय ने मध्य प्रदेश को दे दिया। कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर ज़िलों में पाया जाता है। कई दिनों से इसकी प्रजाती को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद चल रहा था। दोनों ही राज्यों ने इस प्रजाति के मुर्गे के जीआई टैग को लेकर अपना-अपना दावा पेश किया था। साल 2012 में मप्र ने GI रजिस्ट्री ऑफिस चेन्नई में कड़कनाथ के लिए क्लेम किया था वहीं साल 2017 में छत्तीसगढ़ ने अपना दावा पेश किया था। मध्य प्रदेश का दावा था है कि झाबुआ ज़िले में कड़कनाथ मुर्गे की उत्पत्ति हुई है, जबकि छत्तीसगढ़ का दावा था कि कड़कनाथ को प्रदेश के दंतेवाडा ज़िले में अनोखे तरीके से पाला जाता है और यहां उसका संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन होता है।

“कड़कनाथ”

कड़कनाथ चिकन नस्ल अपने काले रंग के पंखों के कारण अद्वितीय है। पौष्टिकता औऱ स्वाद कड़कनाथ की सबसे खास बात है। कड़कनाथ में 25-27 फीसदी प्रोटीन होता है। आम चिकन में यह 18 से 20 फीसदी होता है। वहीं दूसरे चिकन की तुलना में इसमे फेट भी कम होता है। ये मुर्गा विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, केल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन से भरपूर होता है।

‘जियोग्राफ़िकल इंडिकेशंस टैग’ या भौगोलिक संकेतक का मतलब ये है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या सरकार अधिकृत उपयोगकर्ता के अलावा इस उत्पाद के मशहूर नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन ये बताता है कि वह उत्पाद एक ख़ास क्षेत्र से ताल्लुक़ रखता है और उसकी विशेषताएं क्या हैं। साथ ही उत्पाद का आरंभिक स्रोत भी जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन से तय होता है।

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ई कचरा प्रबंधन कानून में किया गया संशोधन |

सरकार ने देश में ई कचरे के पर्यावरण अनुकूल प्रभावी प्रबंधन के लिए ई कचरा नियमों में संशोधन किया है। नियमों में बदलाव के तहत उत्‍पादक जवाबदेही विस्‍तार ईपीआर की व्‍यवस्‍थाओं को पुन परिभाषित किया गया है और इसके तहत बिक्री शुरु करने वाले ई उत्‍पादकों के लिए ई कचरा संग्रहण के नए लक्ष्‍य निर्धारित किए गए हैं। देश में ई कचरा निबटान को सुव्‍यवस्‍थित बनाने के लिए ई कचरे के पुनर्चक्रण या उसे विघटित करने के काम में लगी इकाइयों को वैधता प्रदान करने तथा उन्‍हें संगठित करने के इरादे से नियमों में बदलाव किया गया है।

मुख्‍य तथ्य

-1 अक्‍तूबर 2017 से ई कचरा संग्रहण के नए निधार्रित लक्ष्‍य प्रभावी माने जाएंगे। ई कचरे का संग्रहण लक्ष्‍य 2017-18 के विभिन्‍न चरणों में उत्‍पन्‍न किए गए कचरे के वजन का 10 फीसदी होगा जो 2023 तक प्रतिवर्ष 10 फीसदी के हिसाब से बढ़ता जाएगा। यह लक्ष्‍य वर्ष 2023 के बाद कुल उत्‍पन्‍न कचरे का 70 फीसदी हो जाएगा।
-आरओच के तहत हानिकारक पदार्थों से संबधित व्‍यवस्‍थाओं से उत्‍पादों की जांच का खर्च सरकार वहन करेगी अगर उत्‍पाद आरओएच की व्‍यवस्‍थओं के अनुरूप नहीं हुए तो जांच का खर्च उत्‍पादक को वहन करना होगा।
-खुद को पंजीकृत कराने के लिए उत्‍पादक जवाबदेही संगठनों को नए नियमों के तहत कामकाज करने के लिए केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष आवेदन करना होगा।
-उत्‍पादों की औसत आयु समय समय पर केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित की जाएगी। किसी उत्‍पादक के बिक्री परिचालन के वर्ष उसके उत्‍पादों के औसत आयु से कम होंगे तो ऐसे ई उत्‍पादकों के लिए ई कचरा संग्रहण के लिए अलग लक्ष्‍य निर्धारित किए जायेंगे ।.

इलेक्ट्रानिक कचरा का आशय किसी वैद्युत या इलेक्ट्रानिक उपकरण से है जो टूटा-फूटा, पुराना,खराब या बेकार होने के कारण फेंक दिया गया हो। इसमें से कुछ चीजें री-प्रोसेस् की जा सकतीं हैं अधिसूचना जीएसआर 261 (ई) के तहत 22 मार्च, 2018 को ई-वेस्ट प्रबंधन नियम 2016 को संशोधित किया गया है।

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