पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

विश्व गौरैया दिवस

20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया | इस वर्ष विश्व गौरैया दिवस का विषय ‘I Love Sparrows’ रहा है |

विश्व गौरैया दिवस’

वर्ष 2010 में विश्व गौरैया दिवस पहली बार मनाया गया था। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

मुख्य तथ्य

• गौरैया अब विलुप्ति के कगार पर है। इस नन्हें से परिंदे को बचाने के लिए ही तीन सालों से 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ के रूप में मनाते आ रहे हैं ताकि लोग इस नन्हीं-सी चिड़िया के संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें।
• भारत में गौरैया की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। कुछ वर्षों पहले आसानी से दिख जाने वाला यह पक्षी अब विलुप्त हो रहा है।
• दिल्ली में तो गौरैया इस कदर दुर्लभ हो गई है कि ढूंढे से भी ये पक्षी नहीं मिलता, इसलिए वर्ष 2012 में दिल्ली सरकार ने इसे राज्य-पक्षी घोषित कर दिया।
• पक्षी विज्ञानी हेमंत के अनुसार गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आई है। संरक्षण के उचित प्रयास नहीं किए गए तो हो सकता है कि गौरैया इतिहास का प्राणी बन जाए और भविष्य की पीढ़ियों को यह देखने को ही न मिले।
• रॉयल सोसायटी ऑफ़ प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्डस ने भारत से लेकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में डाला है। अध्ययन के मुताबिक गौरैया की आबादी में करीब 60 फीसदी की कमी आई है। यह ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों में हुआ है। पश्चिमी देशों में हुए अध्ययनों के अनुसार गौरैया की आबादी घटकर खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।

घटती आबादी के कारण

• तेज़ी से कटते पेड़-पौधे
• भोजन और जल की कमी
• घोसलों के लिए उचित स्थानों की कमी
• गौरैया के बच्चों का भोजन शुरूआती दस-पन्द्रह दिनों में सिर्फ कीड़े-मकोड़े ही होते है लेकिन लोग खेतों से लेकर अपने गमले के पेड़-पौधों में भी रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं, जिससे ना तो पौधों को कीड़े लगते हैं और ना ही इस पक्षी का समुचित भोजन पनप पाता है। इसलिए गौरैया समेत दुनिया भर के हज़ारों पक्षी आज या तो विलुप्त हो चुके हैं या फिर किसी कोने में अपनी अन्तिम सांसे गिन रहे हैं।
• आवासीय ह्रास, अनाज में कीटनाशकों के इस्तेमाल, आहार की कमी और मोबाइल फोन तथा मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगें गौरैया के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही हैं।

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प्लास्टिक पार्क के लिए केंद्र ने दी 120 करोड़ की मंजूरी |

केंद्र सरकार ने देवघर में प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने नई दिल्ली में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि देवघर जिले में करीब 120 करोड़ रुपए की लागत से एक प्लास्टिक पार्क तथा एक प्लास्टिक रिसाइकलिंग केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है।

मुख्य बिन्दु

-करीब 150 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क बनेगा, जिससे करीब 6000 लोगों को प्रत्यक्ष तथा 30000 को परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
-इसके अलावा देवघर में साढ़े तीन करोड़ रुपए की लागत से देश के दूसरे प्लास्टिक रिसाइकलिंग केंद्र की भी स्थापना की जाएगी।
-देश का पहला ऐसा केंद्र अभी असम के गुवाहाटी में है।

3.5 करोड़ से प्लास्टिक रिसाइकलिंग केंद्र भी खोला जाएगा

एक केंद्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी संस्थान (सीपेट) भी देवघर में खोला जाएगा। पहले देश में 23 सीपेट थे, जबकि पिछले साढ़े तीन साल में 40 केंद्र खोले गए और इसकी स्वर्ण जयंती पर 50 सीपेट खोलने का लक्ष्य रखा गया है। देश में सालाना 40 हजार प्लास्टिक इंजीनियर तैयार होते हैं। जबकि आठ लाख ऐसे इंजीनियरों की जरूरत है। एक करोड़ टन प्लास्टिक की खपत होती है, जोे वर्ष 2022 तक दोगुना होकर होने की संभावना है।
इससे संथालपरगना क्षेत्र से पलायन और विस्थापन रुकेगा तथा 20 दिनों में परियोजना के लिए जमीन एवं भवन की व्यवस्था की जाएगी ।

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