अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

भारत के बाहर विश्व का पहला योग विश्वविद्यालय लॉस एंजिल्स में शुरू हुआ

भारत के बाहर दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय 23 जून, 2020 को  अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में शुरू किया गया। इस योग विश्वविद्यालय का नाम स्वामी विवेकानंद के नाम पर रखा गया है। इस  विश्वविद्यालय का नाम ‘विवेकानंद योग विश्वविद्यालय’ रखा गया है। इस विश्वविद्यालय को 6वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के स्मरणोत्सव के एक भाग के रूप में लांच किया गया।

मुख्य बिंदु

वर्चुअल लॉन्च इवेंट का आयोजन न्यूयॉर्क सिटी के कॉन्सुलेट जनरल ऑफ़ इंडिया में किया गया था। वी. मुरलीधरन (केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री) और पी.पी. चौधरी (विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से वर्चुअल इवेंट के दौरान विवेकानंद योग विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया।

योग के प्राचीन पारंपरिक भारतीय अभ्यास पर आधारित कार्यक्रम वैज्ञानिक सिद्धांतों और आधुनिक अनुसंधान दृष्टिकोणों के संयोजन के साथ इस विश्वविद्यालय में पेश किए जाएंगे। योग-आधारित उच्च शिक्षा कार्यक्रमों की पेशकश के लिए, विश्वविद्यालय के लांच के लिए आधिकारिक मान्यता नवंबर 2019 में कैलिफोर्निया के ब्यूरो ऑफ प्राइवेट पोस्ट-सेकेंडरी एजुकेशन से प्राप्त हुई थी।

SVYASA स्वामी विवेकानंद योग अनुसन्धान संस्थान (योग के अध्ययन के लिए बेंगलुरु में डीम्ड विश्वविद्यालय) के कुलपति डॉ. एच.आर. नागेंद्र विवेकानंद योग विश्वविद्यालय के पहले अध्यक्ष होंगे। SVYASA की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी, यह भारत और विश्व का पहला योग विश्वविद्यालय है।

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 म्यांमार में दुनिया के सबसे लम्बे इंटरनेट शटडाउन का दूसरा वर्ष शुरू हुआ

21 जून, 2019 को संघर्ष प्रभावित राखीन राज्य के आठ टाउनशिप में और चिन राज्य की एक बस्ती में म्यांमार सरकार द्वारा मोबाइल इंटरनेट सेवाओं बंद कर दिया गया था। सितंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच 5 राज्यों में प्रतिबंध हटा दिए गए लेकिन बाद में फिर से प्रतिबन्ध लागू कर दिए गए। राखीन राज्य की मॉंगडा बस्ती में प्रतिबंध 2 मई, 2020 को  हटा दिया गया था। शेष टाउनशिप में  1 अगस्त, 2020 तक इन्टरनेट बंद रहेगा।

जनवरी, 2019 से म्यांमार सरकार अराकान सेना (राखीन सशस्त्र समूह) के साथ लड़ाई में संलग्न है।

म्यांमार सरकार की  आलोचना

सूचना के अभाव में भोजन, पानी से लेकर चिकित्सा सहायता आदि जैसी आवश्यक सेवाओं की कमी हो जाती है, एक वैश्विक महामारी के समय, इंटरनेट सेवाओं का निलंबन भी इन टाउनशिप में रहने वाले लोगों के लिए और मुश्किलें खड़ी कर देता है।

म्यांमार सरकार के इस कदम से सरकार को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। म्यांमार के दूरसंचार कानून के अनुच्छेद 77 के अनुसार, सरकार आपातकालीन स्थिति के दौरान सेवा को निलंबित कर सकती है। विभिन्न मानवाधिकार संगठन अब अनुच्छेद के संशोधन पर बल दे रहे हैं क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है।

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