अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

विश्व जनसंख्या दिवस : 11 जुलाई

11 जुलाई को पूरे विश्व में लोगों के बीच जनसँख्या से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के उदेश्य से विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है. इस दिवस के बहूआयामी उड़ेश्यों में लिंग भेद, लिंग समानता, परिवार नियोजन आदि के साथ महिलाओं के गर्भधारण सम्बन्धी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को जागरूक करना भी शामिल है.

मुख्य तथ्य

वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र ने सबसे पहले 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी. वर्ल्ड पॉप्युलेशन डे का इस साल का विषय (Theme) “परिवार नियोजन हर मनुष्य का अधिकार है” है. वर्तमान समय सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या 720 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो कि हर दिन तेजी से बढ़ती जा रही है. बढ़ती आबादी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के उदेश्य से ही प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई ‘वर्ल्ड पॉप्युलेशन डे’ के रूप में आयोजित किया जाता है. विश्व की 720 करोड़ की आबादी में से लगभग 132.4 करोड़ व्यक्ति भारत में ही निवास करते है. विश्व बैंक में कार्यरत डॉ के सी ज़कारिया ने सम्पूर्ण विश्व की आबादी पांच अरब होने की स्थिति में यह दिवस मनाने का सुझाव भी दिया था.

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चीन ने पाकिस्तान के लिए दो रिमोट उपग्रहों की शुरुआत की

चीन ने जिउकान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लांग मार्च -2 सी रॉकेट के बोर्ड पर पाकिस्तान के दो रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट पीआरएसएस -1 और पाकटीईएस -1 ए को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह लॉन्ग मार्च रॉकेट श्रृंखला का 279 वां अभियान और 1999 में मोटोरोला के इरिडियम उपग्रहों को कक्षा में ले जाने के लगभग दो दशकों के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण है.

मुख्य तथ्य

पीआरएसएस -1: यह पाकिस्तान को बेचे जाने वाला चीन का पहला ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग उपग्रह है. यह दिन और रात की निगरानी कर सकता है. यहां तक कि यह बादलों की स्थिति देखने की क्षमता भी रखता है.  इसका उपयोग भूमि और संसाधन सर्वेक्षण, कृषि अनुसंधान, शहरी निर्माण, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट और रोड पहल (बीआरआई) के तहत दूरस्थ संवेदन जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाएगा. यह एक विदेशी खरीदार के लिए चीन अकादमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (सीएएसटी) द्वारा विकसित चीन के कुल ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग उपग्रह का 17 वां उपग्रह है.

पाकटीईएस -1A: यह पाकिस्तान का स्वदेशी विकसित वैज्ञानिक प्रयोग उपग्रह है जो इंजीनियरों द्वारा अपनी अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO (अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग) से विकसित किया गया है. उपग्रह 50 बिलियन अमेरिकी डालर की लागत से बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनामिक करिडोर (सीपीईसी) के लिए स्पेस रिमोट सेंसिंग सूचना सेवाएं भी प्रदान करेगा. पाकिस्तान के अंतरिक्ष में पहले से ही पांच उपग्रह है लेकिन लांचर और उपग्रह निर्माण सुविधाओं की कमी के कारण यह चीन पर निर्भर है. अंतरिक्ष में 43 परिचालन उपग्रहों के साथ भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में पाकिस्तान से आगे है. भारत में अपने स्वदेशी रडार इमेजिंग उपग्रह भी हैं जो मौसम निगरानी में सक्षम हैं.

 

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