अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस : 27 जून

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस (MSME) प्रत्येक वर्ष 27 जून को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है. अप्रैल 2017 में इसकी स्थापना के बाद इस वर्ष इसका दूसरा संस्करण आयोजित किया गया. इस दिवस के बहुआयामी उड़ेश्यों में युवा रोजगार में एमएसएमई के महत्व का औचित्य रखना, उचित नौकरियों को हासिल करने के लिए युवाओं को उनमें होने वाले आवश्यक विभिन्न कौशलों के बारे में जागरूक करना और युवा उद्यमशीलता के बारे में जागरूकता बढ़ाना शामिल है.

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग का महत्व

MSME विकास के लिए प्रमुख रोजगार प्रदाता के रूप में मुख्य स्त्रोत का कार्य करता हैं. यह मुख्यत: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को साकार करने पर ज़ोर देता है. यह सभी के लिए नवाचार, रचनात्मकता और उचित काम को प्रवर्तित करता है. उभरते व्यापारों में बनाए गए पांच नए औपचारिक रोजगारों में से चार एमएसएमई के बीच हैं. एमएसएमई श्रमिकों के कमजोर क्षेत्र जैसे महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के लोगों के बड़े हिस्से को रोजगार देता हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई कभी-कभी रोजगार का एकमात्र स्रोत ही होता हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा संकल्प ए/आरईएस/71/279 के माध्यम से लघु व्यवसाय पहुंच में सुधार की आवश्यकता को पहचानने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस की स्थापना की गई. यह संकल्प अर्जेंटीना के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पेश किया गया था तथा 54 सदस्य राज्यों द्वारा इसे सह-प्रायोजित भी किया गया था और इसे अप्रैल 2017 में 193 सदस्यीय यूएनजीए द्वारा मतदान के बिना अपनाया गया था.

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नागर विमानन क्षेत्र में भारत-जर्मनी समझौता ज्ञापन को मिली मंजूरी

27 जून 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रिमंडल ने नागर विमानन क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और जर्मनी के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) को मंजूरी दे दी है. इस समझौता ज्ञापन का शीर्षक नागर विमानन क्षेत्र में सहयोग पर भारत और जर्मनी के बीच अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणा है, इस संयुक्‍त घोषणा से भारत और जर्मनी के बीच विमान परिवहन में कारगर विकास की सुनिश्चिति होगी.

मुख्य बिंदु

अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणा के रूप में प्रस्तावित इस समझौता ज्ञापन से भारत और जर्मनी के बीच नागर विमानन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा जिसकी सहायता से दोनों देशों के बीच अधिक व्‍यापार, पर्यटन, निवेश, तथा सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान किया जा सकेगा. दोनों देशों ने नागर विमानन क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव को साझा करने हेतु अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणा के जरिये पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने की मंशा जताई. इस अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणा उद्देश्‍य निम्न क्षेत्रों में पारस्‍परिक सहयोग करना है.

  1. विमानन सुरक्षा तथा एयर ट्रैफिक प्रबंधन: सेमीनारों, गोष्ठियों, एक दूसरे देशों की यात्राओं तथा अन्‍य विचारों सहित विमान सुरक्षा गतिविधियों तथा सुरक्षा निगरानी से संबंधित सूचना और श्रेष्‍ठ व्‍यवहारों का साझाकरण.
  2. हेलीपोर्ट तथा हेलीकॉप्‍टर आपात चिकित्‍सा सेवा (एचईएमएस): हेलीपोर्ट तथा हेलीकॉप्‍टर आपात चिकित्‍सा सेवाओं से संबंधित सूचना तथा श्रेष्‍ठ व्‍यवहारों को साझा करना.
  3. नियमन तथा नीति: महत्‍वपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय विषयों पर आईसीएओ में सहयोग जारी रखना.
  4. कॉरपोरेट तथा व्‍यवसाय विमानन विकास: व्यवसाय तथा गैर-वाणिज्यिक विमानन के लिए सुविधाओं पर सूचना साझा करना.
  5. प्रशिक्षण और कौशल विकास: तकनीकी तथा गैर-तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण विशेषकर विमानन सुरक्षा निगरानी में साझेदारी की संभावना तलाश करना.
  6. पर्यावरण: सतत तथा पर्यावरण अनुकूल एयरोड्रोम विकास तथा नियोजन पर फोकस के साथ एयरोड्रमों की सरकारी निगरानी से संबंधित अनुभव को साझा करना तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटना तथा घरेलू तथा अंतर्राष्‍ट्रीय दोनों स्‍तरों पर संबंधित ग्रीन हाऊस गैस (जीएचजी) उत्‍सर्जनों का समाधान करना.

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