अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

भारतीय टॉमी थॉमस बने मलेशिया के अटॉर्नी जनरल

भारतीय मूल के वकील टॉमी थॉमस को मलेशिया में अटॉर्नी जनरल के पद के लिए नियुक्त किया गया है. हालांकि मलेशिया में इस्लामिक समूहों ने इनकी नियुक्ति का काफी विरोध भी किया. मलेशिया के सुल्तान मोहम्मद पंचम ने वर्तमान अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अपांडी अली को इस पद से हटाते हुये टॉमी थॉमस की नियुक्ती की है. भारतवंशी टॉमी थॉमस 55 वर्षों में इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले अल्पसंख्यक व्यक्ति हैं.

मुख्य बिंदु

66 वर्षीय टॉमी थॉमस पिछले 42 वर्षों से मलेशिया में वकील है उन्हें संवैधानिक और दीवानी मामलों के कानूनी विशेषज्ञ के रूप में संबोधित किया जाता है. थॉमस की अटॉर्नी जनरल के पद पर नियुक्ति का इस्लामिक समूहों ने काफी विरोध भी किया वे चाहते थे कि यह पद किसी मुस्लिम व्यक्ति को दिया जाये.

टॉमी थॉमस ने मलेशिया के मौजूदा अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अपांडी अली की जगह ली है. टॉमी थॉमस का जन्म कुआलालम्पुर में हुआ तथा उन्होनें विक्टोरिया इंस्टीट्यूशन, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपनी पढ़ाई पूरी की. मलेशिया सुल्तान मोहम्मद पंचम ने वहाँ के नागरिकों से अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति से कोई धार्मिक या जातीय संघर्ष खड़ा न करते हुये इस फैसले को स्वीकार करने की गुजारिश की है.

 

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अब्दुल फतह अल सिसी पुनः बने मिस्र के राष्ट्रपति

02 जून 2018 को मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सिसी ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली. अब्दुल फतह अल सिसी इससे पहले भी वर्ष 2014 में भारी बहुमत के साथ मिस्र के राष्ट्रपति बने थे. राष्ट्रपति के रूप में सिसी की नियुक्ति होने पर उनका स्वागत 21 तोपों की सलामी देकर किया गया.

मुख्य बातें

राष्ट्रपति के रूप में सिसी ने अपने दूसरे चार साल के कार्यकाल की शपथ ली. 2018 में हुये मिस्र के राष्ट्रपति के चुनाव में अब्दुल फतह अल सिसी 97% वैध मतों के साथ राष्ट्रपति चुने गए है. इस दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल में सिसी शिक्षा और स्वास्थ्य संबन्धित विषयों पर विशेष ध्यान देंगे. वर्ष 2014 के चुनाव में भी अब्दुल फतह अल सिसी ने भारी वोटों के साथ जीत दर्ज करते हुये मिस्र के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को प्रतिस्थापित किया था. इस बार के चुनाव में मुस्तफा मूसा जो अब्दुल फतह अल सिसी के इकलौते प्रतिद्वंद्वी थे, किन्तु मुस्तफा मूसा की लोकप्रियता कम होने के कारण अब्दुल फतह अल सिसी का चुनाव में जीतना पहले से ही तय माना जा रहा था. और मुस्तफा मूसा भी सिसी के ही समर्थक थे. लोगो का मानना है कि वर्ष 2011 के बाद अर्थव्यवस्था में आई गिरावट की स्थिति में सुधार लाने के लिए अब्दुल फतह अल सिसी का राष्ट्रपति के रूप में सत्ता में आना आवश्यक था.

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