राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

कैबिनेट की मंजूरी: कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट कर दिया गया

3 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट करने का अनुमोदन किया। बंदरगाह का नाम बदलने की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने 11 जनवरी, 2020 को की थी।

अक्टूबर 2019 में, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम  पर चेनानी-नाशरी सुरंग का नाम बदल दिया गया था। यह सुरंग जम्मू और कश्मीर की सबसे लंबी है और NH-44 पर स्थित है। यह द्वि-दिशात्मक है और श्रीनगर और जम्मू के बीच 30 किमी की दूरी को कम करती है। इससे यात्रा का समय 2 घंटे कम हो जाता है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक राजनेता, शिक्षाविद व बैरिस्टर थे, उनका जन्म 6 जुलाई, 1901 को कलकत्ता में हुआ था। वे पंडित जवाहरलाल नेहरु की सरकार में उद्योग व आपूर्ति मंत्री थे। जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पंडित नेहरु से मतभेद होने के कारण वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग हुए। 1951 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता से भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिससे बाद में भारतीय जनता पार्टी अस्तित्व में आई। गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 कड़ा विरोध किया था, इस संदर्भ में उन्होंने कहा था “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”। इसके विरोध में डॉ. मुखर्जी 1953 में कश्मीर गये और भूख हड़ताल की। उनका निधन 23 जून, 1953 में जम्मू-कश्मीर में हिरासत में रहस्यमय परिस्थितयों में हुआ था।

 

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किसान हितैषी आवश्यक वस्तु अधिनियम को मंजूरी दी

3 जून, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन किए हैं। संशोधन के तहत, किसानों के लिए नियामक वातावरण को उदार बनाया गया है।

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसान समझौता

इस अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया गया है। यह अध्यादेश किसानों को एग्रीगेटर, प्रोसेसर, निर्यातक और बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ जुड़ने की अनुमति देगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन के तहत, कृषि उत्पादों जैसे दाल, अनाज, प्याज, आयलसीड और आलू को डीरेगुलेट कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषणा की थी कि एक केंद्रीय कानून बनाया जाएगा जो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बाध्य नहीं करेगा। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि कानून किसानों को केवल कृषि उपज मंडी समिति की मंडियों में लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों को अपनी उपज बेचने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

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