राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर भारत लगाएगा स्टील फेंस

भारत बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में नॉन-कट स्टील फेंस (बाड़) लगाएगा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर अफ़ग़ान आतंकी पाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

पहले स्टील फेंस को असम के सिलचर में 7 किलोमीटर लम्बी बांग्लादेश सीमा के साथ लगाया जाएगा। स्टील फेंस को लगाये जाने के बाद BSF द्वारा इसका विश्लेषण किया जाएगा। इस बाड़बंदी के क्रियान्वयन के आधार पर अन्य संवेदनशील इलाकों में स्टील फेंस लगायी जायेगी। इस प्रकार की स्टील फेंसिंग लगाने के लिए प्रति किलोमीटर 2 करोड़ रुपये की लागत आती है।

स्टील फेंसिंग के अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर लेज़र फेंस भी लगाने की योजना है। इसके क्रियान्वयन के लिए CIMBMS (Comprehensive Integrated Border Management System) को गति दी गयी है। CIMBMS केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है।

आवश्यकता

सीमा के निकट प्रशिक्षित आतंकियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण घुसपैठ को रोकने के लिए मज़बूत बाड़बंदी आवश्यक है। सीमा पर उचित सुरक्षा  न होने के कारण आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करके समस्या खड़ी कर सकते हैं।

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भारत सरकार ने जारी किया राज्य उर्जा दक्षता सूचकांक

10 जनवरी, 2020 को उर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने अलायन्स फॉर एनर्जी एफिशिएंट इकॉनमी के साथ मिलकर ‘राज्य उर्जा दक्षता सूचकांक, 2019’ जारी किया। इस सूचकांक को आधारभूत उर्जा आवश्यकता जैसे कोयला, बिजली, गैस तथा तेल इत्यादि को मध्यनजर रखते हुए तैयार किया गया है। इस सूचकांक के द्वारा 36 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की उर्जा दक्षता पहलों की प्रगति को ट्रैक किया गया है।

मुख्य बिंदु

इस सूचकांक के अनुसार कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पुदुचेरी सबसे भीतर प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं। इसी सूची में मणिपुर, झारखण्ड, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन काफी ख़राब है।

सूचक

इस सूचकांक को मात्रात्मक, गुणात्मक तथा परिणाम आधारित सूचकों के आधार पर तैयार किया गया है। इसके लिए उद्योग, भवनों, परिवहन, नगरपालिकाओं, डिस्कॉम्स तथा कृषि सेक्टर के परिणामों का अध्ययन किया गया।

महत्व

देश में इस प्रकार के सूचकांक को पहली बार अगस्त, 2018 में जारी किया गया था। इस सूचकांक की सहायता से राज्यों को उर्जा सुरक्षा तथा जलवायु क्रिया में सहयोग करने के लिए सहायता मिलेगी। इसके द्वारा राज्य अपनी प्रगति का आकलन कर सकते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों को नीति निर्माण से आगे बढ़ते हुए नीतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए कार्य करना चाहिए।

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