राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

ईपीएफओ योजना: पेंशनभोगियों को 764 करोड़ रुपये जारी किये गये

5 मई, 2020 को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पेंशनरों को 764 करोड़ रुपये जारी किए।

मुख्य बिंदु

लगभग 135 क्षेत्र कार्यालयों ने भुगतान की प्रक्रिया पूरी की। लॉक डाउन के दौरान पेंशनरों को असुविधा से बचाने के लिए यह कार्य किया गया है। पूरे देश में बैंक शाखाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि पेंशन समय पर जमा हो।

ईपीएफओ

ईपीएफओ का अर्थ रोजगार भविष्य निधि संगठन (Employment Provident Fund Organization) है। इसकी स्थापना EPF और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत की गयी थी। EPFO ​​योजना का क्रियान्वयन श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

ईपीएफओ योजना, 1952

यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई पहली EPFO ​​योजना थी। इसके तहत मजदूरों को मृत्यु और सेवानिवृत्ति पर जमा राशि और ब्याज का भुगतान किया गया। इसमें विवाह, शिक्षा, गृह निर्माण और बीमारी के लिए आंशिक निकासी की अनुमति दी गयी थी।

ईपीएफ योजना 1995

इस योजना से विकलांग बचे लोगों को लाभ मिला जो ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए। इसके अन्य लाभार्थी विधवाएं और बच्चे थे।

2014 में, EPFO ​​के माध्यम से लाभान्वित होने वाले कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर शुरू किया गया था।

सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक, 2019

भविष्य निधि में कर्मचारी योगदान को कम करने के लिए 2019 में बिल पेश किया गया था। भविष्य निधि में दो घटक होते हैं जैसे कर्मचारी भाग और नियोक्ता भाग। वर्तमान में कर्मचारियों का हिस्सा मूल वेतन का 12% है। इस बिल का उद्देश्य कर्मचारियों को उनके योगदान को कम करने के लिए एक विकल्प प्रदान करना है।

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Government e Marketplace (GeM) पोर्टल पर “द सरस कलेक्शन” लॉन्च किया गया

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने Government e Marketplace (GeM) पोर्टल पर “द सरस कलेक्शन” लॉन्च किया। इसमें ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए दैनिक उपयोगिता उत्पादों को प्रदर्शित करता है।

यह GeM और दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की एक पहल है। यह ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों को बाजार पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस

यह एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जहाँ पर विभिन्न सरकारी विभाग व एजेंसियां अपनी आवश्यकता की वस्तुएं व सेवाएं खरीद सकती हैं। इससे सरकारी विभागों वस्तुओं की खरीद में पारदर्शिता, कैशलेस व पेपरलेसनेस को बढ़ावा मिलेगा। इससे वस्तुओं की खरीद पर सरकारी व्यय में बचत भी होगी।

इसे अगस्त, 2018 में लांच किया गया था, अब तक इस प्लेटफार्म पर मूल्य के मामले में 10,800 करोड़ रुपये तथा लेनदेन के मामले में 6.96 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया गया है। GeM प्लेटफार्म पर 1.35 विक्रेता मौजूद हैं जो 4.43 लाख वस्तुओं का विक्रय करते हैं।  इस प्लेटफार्म पर लगभग 26,500 क्रेता संगठन मौजूद हैं।

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