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पेमेंट टेक्नोलॉजी कंपनी वीज़ा ने पी.वी. सिन्धु को ब्रांड एम्बेसडर बनाया

पेमेंट टेक्नोलॉजी कंपनी वीज़ा ने पी.वी. सिन्धु को दो वर्ष के लिए ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। इसके साथ ही पी.वी. सिन्धु टोक्यो ओलिंपिक 2020 के लिए टीम वीज़ा की एथलीट सदस्य बन गयी हैं। ‘टीम वीज़ा’ कंपनी का वैश्विक एथलीट सहायता कार्यक्रम है, इस कार्यक्रम के तहत ओलिंपिक तथा पैरालिम्पिक खेलों की आकांक्षा रखने वाले एथलीट्स की सहायता की जाती है। टीम वीज़ा ने वर्ष 2000 में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से अब तक 400 से अधिक ओलिंपिक तथा पैरालिम्पिक एथलीट्स की मदद की है।

वीजा

वीजा एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है, यह कंपनी वित्तीय सेवा प्रदान करती है। वीज़ा क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड तथा गिफ्ट कार्ड की सुविधा प्रदान करती है। वीजा कंपनी की स्थापना 1958 में बैंक अमेरिकार्ड के रूप में डी हॉक ने की थी। वीजा का मुख्यालय अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में फोस्टर सिटी में स्थित है। वर्तमान में वीजा कंपनी के सीईओ अल्फ्रेड एफ. केली हैं।

पी. वी सिन्धु

पी. वी. सिन्धु भारत के सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक हैं। उनका जन्म 5 जुलाई, 1995 को तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने 2016 के रिओ ओलिंपिक में देश के लिए रजत पदक जीता था। 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन के महिला एकल वर्ग में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके अलावा वर्ल्ड चैंपियनशिप 2017 और 2018 में उन्होंने रजत पदक जीता था। पी.वी. सिन्धु विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय  हैं। 2016 में सिन्धु को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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ग्रेटा थनबर्ग ने जीता राईट लाइवलीहुड फाउंडेशन पुरस्कार

स्वीडन बेस्ड राईट लाइवलीहुड फाउंडेशन ने 4 विजेताओं की घोषणा की, इस पुरस्कार के विजेता को एक मिलियन स्वीडिश क्रोनर की इनामी राशि प्रदान की गयी। इस वर्ष के चार विजेता हैं : ग्रेटा थनबर्ग, सहरावी मानवाधिकार कार्यकर्ता अमिनातो हैदर, चीनी महिला अधिकार समर्थक गुओ जियन्मेइ तथा ब्राज़ीलियाई हुतुकारा यानोमामी एसोसिएशन तथ इसके नेता दावी कोपेनावा।

ग्रेटा थनबर्ग

स्वीडन की 16 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग को 2019 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए मनोनीत किया गया है। ग्रेटा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कार्य करती हैं। ग्रेटा स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट मूवमेंट की संस्थापक हैं। इस आन्दोलन की शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी, जब ग्रेटा ने स्वीडिश संसद के बाहर अकेले विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर कार्य करने के लिए छात्रों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। यदि ग्रेटा इस पुरस्कार को जीत जाती हैं तो वे नोबेल शांति पुरस्कार की सबसे युवा विजेता बन जायेंगी। इससे पहले मलाला यूसुफ़जई ने 2014 में 17 वर्ष की आयु में नोबेल शांति पुरस्कार जीता था। नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता की घोषणा अक्टूबर, 2019 में की गयी थी।

ग्रेटा थनबर्ग का जन्म 3 जनवरी, 2003 को स्वीडन में हुआ था। उन्होंने स्वीडन की संसद के समक्ष पेरिस समझौते के मुताबिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए विरोध प्रदर्शन किया था। इसके लिए उन्होंने स्कूल न जा कर संसद के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने विश्व के अन्य देशों में छात्रों को प्रेइर्ट किया। दिसम्बर, 2018 तक विश्व के 270 शहरों में 20,000 में स्कूलों में हड़ताल की। ग्रेटा को स्टॉकहोल्म में टेड टॉक में संबोधन देने के लिए भी आमंत्रित किया जा चुका है।

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